Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। महानदी किनारे बसे ग्राम मिरचिद में टमाटर की उन्नत खेती किसानों के लिए आय का मजबूत जरिया बनकर उभर रही है। यहां करीब 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र में टमाटर की खेती की जा रही है, जिससे गांव की आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार देखा जा रहा है। इसी गांव के किसान लेखराम केवट पिछले 15 वर्षों से टमाटर की खेती कर रहे हैं और अपनी मेहनत व अनुभव के दम पर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। वर्तमान में वे लगभग ढाई एकड़ जमीन में टमाटर उगा रहे हैं। सही तकनीक और बाजार की मांग के अनुसार खेती करने से उन्हें बेहतर उत्पादन मिल रहा है।
लेखराम केवट मुख्य रूप से “लक्ष्मी” वैरायटी के टमाटर की खेती करते हैं। इस किस्म की बाजार में अच्छी मांग रहती है और इसका उत्पादन भी संतोषजनक होता है। उनके खेत में तैयार टमाटर स्थानीय हाट-बाजार के अलावा रायगढ़ और शिवरीनारायण मंडियों तक भेजे जाते हैं। उत्पादन के स्तर पर उनके खेत से रोजाना लगभग 100 कैरेट से अधिक टमाटर की बिक्री होती है। इससे उन्हें हर महीने करीब 50 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त होती है। सालाना आय लगभग 6 लाख रुपये तक पहुंच रही है, जिससे उनका परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है।
खेती की खास बात यह है कि इसमें बाहरी मजदूरों की जरूरत नहीं पड़ती। लेखराम अपने परिवार के साथ मिलकर ही पूरी खेती का काम करते हैं। इससे लागत कम रहती है और परिवार के सदस्यों को रोजगार भी मिलता है। मिरचिद गांव में टमाटर की खेती का बढ़ता दायरा अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। किसान आधुनिक तकनीक और बेहतर किस्मों को अपनाकर उत्पादन बढ़ा रहे हैं। इससे गांव धीरे-धीरे सब्जी उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यह उदाहरण दिखाता है कि सही योजना, मेहनत और बाजार की समझ के साथ खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।