बिलासपुर कोर्ट में फर्जी बीमा क्लेम का मामला, 5 वकील और नोटरी समेत 7 लोगों पर FIR
छग
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला न्यायालय स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में फर्जी बीमा क्लेम का मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला के नाम पर बिना जानकारी के मुआवजे का दावा पेश किया गया। मामला उजागर होने के बाद सिविल लाइन पुलिस ने एक ग्रामीण, पांच वकीलों और एक नोटरी के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना का केस दर्ज किया है। जानकारी के अनुसार, जशपुर जिले के बगीचा क्षेत्र की रहने वाली महिला प्रेमिका कुजूर के नाम से कोर्ट में ‘प्रेमिका कुजूर बनाम मुरली यादव’ शीर्षक से क्षतिपूर्ति दावा प्रस्तुत किया गया था। 13 मार्च को जब कोर्ट में महिला का बयान लिया गया, तब उसने साफ तौर पर कहा कि उसने न तो कोई दावा दायर किया है और न ही किसी वकील को अधिकृत किया है।
उसने यह भी बताया कि उसने किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। महिला के इस बयान के बाद मामला गंभीर हो गया और न्यायालय ने पूरे प्रकरण को संज्ञान में लिया। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि भोले-भाले ग्रामीणों के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से बीमा क्लेम लेने की कोशिश की गई थी। न्यायालय ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के साथ धोखा और आपराधिक साजिश मानते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए। कोर्ट के प्रस्तुतकार जानेन्द्र दुबे द्वारा इस मामले की शिकायत सिविल लाइन थाना में दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जशपुर निवासी जोनी कुजूर, अधिवक्ता एनपी चंद्रवंशी, भगवती कश्यप, शुभम चंद्रवंशी, सूरज कुमार और अन्य के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। इसके साथ ही नोटरी अधिवक्ता संतोष कुमार यादव के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित दस्तावेजों में आवेदकों की अनुपस्थिति के बावजूद शपथ पत्रों का नोटरी प्रमाणीकरण किया गया। इसे न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही और फर्जीवाड़ा माना जा रहा है। कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि इस तरह की कार्रवाई न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़ा करती है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच शुरू कर दी गई है और दस्तावेजों की सत्यता, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस तरह के अन्य मामले भी सामने आए हैं या नहीं। फिलहाल सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। इस घटना के बाद न्यायालय और पुलिस दोनों ही स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है ताकि भविष्य में इस प्रकार के फर्जी मामलों को रोका जा सके।