कांकेर में भावुक विदाई, महिला पुलिसकर्मियों ने निभाई ‘डोर छेकना’ परंपरा
छग
Bhanupratappur. भानुप्रतापपुर। जिले के कोरर थाना परिसर में तबादले के बाद एक अनोखी और भावुक विदाई देखने को मिली, जहां थाना प्रभारी के बिलासपुर स्थानांतरण पर महिला पुलिसकर्मियों ने बस्तर की पारंपरिक “डोर छेकना” रस्म निभाई। यह दृश्य पूरे परिसर में चर्चा का विषय बन गया और विदाई का माहौल सांस्कृतिक रंग में बदल गया। जानकारी के अनुसार, कोरर थाना प्रभारी जितेंद्र गुप्ता का हाल ही में बिलासपुर तबादला हुआ है। उनके नए पदस्थापन के लिए रवाना होने के दौरान थाना परिसर में मौजूद महिला कर्मचारियों ने बस्तर की पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार उनका रास्ता रोक लिया।
“डोर छेकना” परंपरा का पालन किया। इस दौरान थाना प्रभारी ने मुस्कुराते हुए परंपरा का सम्मान किया और महिला कर्मचारियों को भेंट स्वरूप नेग दिया। इसके बाद परंपरा के अनुसार रास्ता खोला गया और उन्हें शुभकामनाओं के साथ विदाई दी गई। यह पूरा दृश्य बेहद भावुक और सौहार्दपूर्ण रहा, जिसे वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों और स्टाफ ने भी देखा। बस्तर क्षेत्र में “डोर छेकना” परंपरा को सम्मान, अपनापन और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। किसी सम्मानित व्यक्ति या अतिथि की विदाई के समय परिजन या ग्रामीण प्रतीकात्मक रूप से रास्ता रोककर नेग की मांग करते हैं, और नेग मिलने के बाद ही रास्ता खोला जाता है।
यह परंपरा वर्षों से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही है। थाना परिसर में हुई इस विदाई ने पुलिस व्यवस्था के भीतर मानवीय और सांस्कृतिक संबंधों की झलक भी पेश की। महिला कर्मचारियों द्वारा निभाई गई इस परंपरा ने माहौल को औपचारिक विदाई से हटकर एक यादगार सांस्कृतिक पल में बदल दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस तरह की परंपराएं न केवल संस्कृति को जीवित रखती हैं, बल्कि आपसी सम्मान और आत्मीयता को भी मजबूत करती हैं। कोरर थाना की यह विदाई इसी परंपरा का सुंदर उदाहरण बनकर सामने आई। थाना प्रभारी जितेंद्र गुप्ता ने भी इस परंपरा को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया और सभी कर्मचारियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की सांस्कृतिक परंपराएं पुलिस और समाज के बीच रिश्तों को और मजबूत करती हैं।