ED की बड़ी कार्रवाई: शशांक चोपड़ा की दो लग्जरी कारें जब्त

छग

Update: 2025-09-06 14:08 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। शनिवार को रायपुर जोनल ऑफिस की टीम ने पोर्शे केयेन कूप और मर्सिडीज-बेंज जैसी दो लग्जरी गाड़ियां जब्त कर लीं। ये गाड़ियां मोक्षित कॉर्पोरेशन के नाम पर पंजीकृत हैं, जो घोटाले के मुख्य आरोपी शशांक चोपड़ा और उनके पिता शांतिलाल चोपड़ा की पार्टनरशिप फर्म है।
दुर्ग छापे के बाद गाड़ियां सीज
ED ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि 28 अगस्त को दुर्ग में शशांक चोपड़ा और अन्य आरोपियों के ठिकानों पर छापा मारा गया था। उसी कार्रवाई के दौरान मिली जानकारी के आधार पर दोनों गाड़ियों को सीज किया गया। एजेंसी के अनुसार, यह गाड़ियां संदिग्ध स्रोत से अर्जित धन से खरीदी गई हैं। सूत्रों का कहना है कि अब जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा और हेल्थ सर्विसेज के कई बड़े अधिकारियों पर ED का शिकंजा कस सकता है।
FIR और चार्जशीट बनी आधार
ED की यह जांच ACB/EOW रायपुर की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। एफआईआर और चार्जशीट में मोक्षित कॉर्पोरेशन के साथ-साथ CGMSC और डायरेक्टरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DHS) के कई अधिकारियों पर आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज है। चार्जशीट में साफ लिखा है कि शशांक चोपड़ा ने अधिकारियों से मिलकर टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी की। फर्जी डिमांड तैयार की गई और मेडिकल उपकरण व रिएजेंट की सप्लाई मनमाने दामों पर की गई। इस पूरे खेल से राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का वित्तीय नुकसान हुआ और आरोपियों ने निजी लाभ कमाया।
पहले भी हुई थी करोड़ों की जब्ती
यह पहली बार नहीं है जब ED ने CGMSC घोटाले में इतनी बड़ी कार्रवाई की हो। 30 जुलाई 2025 को भी आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी। उस दौरान 40 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त और फ्रीज की गई थी। उस कार्रवाई में भी दो लग्जरी गाड़ियां — मिनी कूपर और टोयोटा फॉर्च्यूनर जब्त की गई थीं। इन गाड़ियों और संपत्तियों को भी घोटाले से अर्जित अवैध धन से खरीदा जाना पाया गया था।
हेल्थ सर्विसेज अधिकारियों पर टेढ़ी नजर
सूत्रों के मुताबिक, अब ED सीधे स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों पर ध्यान केंद्रित करने वाली है। माना जा रहा है कि जिन अधिकारियों ने टेंडर हेराफेरी और फर्जी खरीद प्रक्रिया को मंजूरी दी, उन पर बहुत जल्द सख्त कार्रवाई हो सकती है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई नाम इस घोटाले में सामने आ चुके हैं, और ACB/EOW पहले ही इनके खिलाफ चार्जशीट पेश कर चुकी है। अब प्रवर्तन निदेशालय इन्हीं आरोपों की वित्तीय जांच कर रहा है।
घोटाले का तरीका
जांच एजेंसियों के मुताबिक, शशांक चोपड़ा और उनके सहयोगियों ने फर्जी डिमांड उठाकर मेडिकल इक्विपमेंट व रिएजेंट की आपूर्ति दिखाई। इसके बाद बाजार मूल्य से कहीं अधिक दाम पर बिल तैयार किए गए। अधिकारियों की मिलीभगत से ये बिल पास हुए और भुगतान जारी हुआ। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगा, जबकि आरोपी अवैध मुनाफा कमाते रहे।
ED की कड़ी निगरानी
प्रवर्तन निदेशालय अब इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की गहराई से जांच कर रहा है। जिन संपत्तियों और गाड़ियों को अब तक सीज किया गया है, वे सभी आरोपियों के भ्रष्टाचार से जुड़ी आय को इंगित करती हैं। ED का मानना है कि घोटाले से हुई कमाई को अलग-अलग शेल कंपनियों और पार्टनरशिप फर्मों के जरिए घुमाकर इस्तेमाल किया गया। मोक्षित कॉर्पोरेशन इसका बड़ा उदाहरण है। CGMSC घोटाला सामने आने के बाद से छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी हलचल मच गई है। विपक्ष लगातार सरकार पर भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियों को अपना काम करने दिया जाए। ED की कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह घोटाला और भी बड़े खुलासे करेगा।
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