ED की कार्रवाई, अनवर ढेबर-पूर्व IAS अनिल टुटेजा से जुड़ी 1000 करोड़ से अधिक संपत्तियां अटैच

छग

Update: 2026-06-01 13:59 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी अनवर ढेबर और पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा से जुड़ी 1000 करोड़ रुपये से अधिक बाजार मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। ED का दावा है कि 2019 से 2023 के बीच राज्य में हुए कथित शराब घोटाले के जरिए 2883 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की गई। ED द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत तीन अनंतिम कुर्की आदेश (PAO) जारी किए गए हैं। इनमें कई अचल संपत्तियां, बैंक खाते, शेयर, म्यूचुअल फंड और लग्जरी संपत्तियां शामिल हैं। जांच एजेंसी ने रायपुर स्थित ढेबर सिटी सहित कई जमीनों को भी कुर्क किया है, जबकि गोवा के अंजुना स्थित प्रीमियम होटल “वेस्टिन गोवा” को भी अटैच किया गया है।
जांच में सामने आया है कि कथित शराब सिंडिकेट का संचालन अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा के नेतृत्व में किया जा रहा था, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों, डिस्टलरी मालिकों और निजी कंपनियों की मिलीभगत शामिल थी। आरोप है कि शराब की खरीद दरों में कृत्रिम वृद्धि, अवैध शराब उत्पादन और कमीशन आधारित लाइसेंसिंग सिस्टम के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध वसूली की गई। ED के अनुसार, शराब घोटाले से जुड़े नेटवर्क ने FL-10A लाइसेंस और डिस्टलरी सिस्टम के जरिए सिंडिकेट को मजबूत किया। जांच में यह भी सामने आया कि चयनित कंपनियों से 50–60 प्रतिशत तक कमीशन वसूला गया और अवैध धन को विभिन्न शेल कंपनियों और बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया।
पहले PAO में विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी संपत्तियों को अटैच किया गया है। विकास अग्रवाल को सिंडिकेट का वित्तीय प्रबंधन संभालने वाला बताया गया है, जो डिस्टलरी और लाइसेंसधारियों से कमीशन एकत्र कर सीधे ढेबर तक पहुंचाता था। इन संपत्तियों का मूल्य लगभग 30 करोड़ रुपये बताया गया है। दूसरे PAO में गोवा के “वेस्टिन गोवा” होटल को शामिल किया गया है, जो मेसर्स पैसिफिक होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर है। जांच के अनुसार, इस होटल के अधिग्रहण में लगभग 110 करोड़ रुपये का भुगतान शराब घोटाले से प्राप्त नकदी से किया गया था। इस लेनदेन में चैतन्य बघेल की भूमिका का भी उल्लेख जांच में किया गया है।
तीसरे PAO में तीन FL-10A लाइसेंसधारी कंपनियों—ओम साई बेवरेजेज प्रा. लि., दिशिता वेंचर्स प्रा. लि. और नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्रा. लि.—के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड जब्त किए गए हैं। इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50 से 60 प्रतिशत सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर किया जाता था, जिससे लगभग 51 करोड़ रुपये की अवैध राशि का लेनदेन सामने आया है। ED ने इस मामले में विशेष अदालत (PMLA) रायपुर में छठी अनुपूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है, जिसमें चार नए आरोपियों को शामिल किया गया है। इनमें व्यवसायी विजय भाटिया, टी. भुनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर के नाम शामिल हैं। अब इस मामले में कुल 85 आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए के तहत कार्रवाई चल रही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले को तीन श्रेणियों—A, B और C—में अंजाम दिया गया। A श्रेणी में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी कमीशन वसूली, B श्रेणी में नकली होलोग्राम के जरिए अवैध शराब बिक्री और C श्रेणी में सप्लाई जोन के जरिए अवैध उगाही शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में प्रति पेटी 75 रुपये और बाद में 100 रुपये तक कमीशन लिया गया। नकली होलोग्राम और ओवरबिलिंग के जरिए सरकारी दुकानों से शराब की बिक्री कराई गई। अनुमान है कि 40 लाख पेटी से अधिक शराब की बिक्री में अनियमितता पाई गई।
C श्रेणी में देशी शराब सप्लाई के लिए जोन निर्धारण में हेरफेर कर अवैध वसूली की गई। तीन वित्तीय वर्षों में लगभग 52 करोड़ रुपये की राशि सिंडिकेट तक पहुंचने के साक्ष्य मिले हैं। ED और EOW/ACB की संयुक्त जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें प्रशासनिक, व्यावसायिक और निजी स्तर पर मिलीभगत के जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसियों का कहना है कि आगे और भी संपत्तियों और नामों का खुलासा हो सकता है।
Tags:    

Similar News