सट्टे का नहीं जमीन के कमीशन का था विवाद, राजनांदगांव पुलिस ने किया खंडन
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Rajnandgaon. राजनांदगांव। जिले में एक विवाद को कथित तौर पर सट्टे के लेन-देन और गुंडागर्दी से जोड़कर प्रकाशित किए गए समाचार का राजनांदगांव पुलिस ने खंडन किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि संबंधित घटना का कारण सट्टे का लेन-देन नहीं था, बल्कि जमीन के कमीशन से जुड़ा विवाद था। पुलिस ने घटना में शामिल लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करते हुए अपुष्ट जानकारी प्रसारित नहीं करने की अपील की है। राजनांदगांव पुलिस की ओर से जारी खंडन में कहा गया है कि प्रकाशित समाचार में संबंधित घटना को “सट्टे के लेन-देन को लेकर विवाद” और “गुंडागर्दी” के रूप में प्रस्तुत किया गया था। पुलिस के मुताबिक, जांच और उपलब्ध तथ्यों में ऐसी बात सामने नहीं आई है। इसलिए पुलिस ने समाचार में किए गए इन दावों का खंडन किया है।
जमीन के कमीशन को लेकर हुआ था विवाद
पुलिस ने घटना के पीछे की वजह को स्पष्ट करते हुए बताया कि विवाद सट्टे से संबंधित नहीं था। प्रारंभिक तथ्यों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच जमीन के कमीशन से जुड़ा विवाद था। इसी बात को लेकर घटनाक्रम हुआ था। ऐसे में इसे सट्टे के लेन-देन से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि घटना में शामिल आरोपियों और प्रार्थियों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। संबंधित व्यक्तियों का नाम पुलिस की गुंडा सूची में भी शामिल नहीं है। ऐसे में घटना को “गुंडागर्दी” के रूप में प्रस्तुत करना भी वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं है।
आपराधिक रिकॉर्ड को लेकर पुलिस ने दी सफाई
पुलिस का कहना है कि किसी घटना से जुड़े व्यक्तियों को लेकर आपराधिक पृष्ठभूमि या गुंडा सूची से संबंधित जानकारी प्रकाशित करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। बिना पुष्टि किसी व्यक्ति को अपराध या गुंडागर्दी से जोड़ने से लोगों के बीच गलत धारणा बन सकती है। पुलिस ने साफ किया कि इस मामले में घटना में शामिल पक्षों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इसलिए संबंधित घटनाक्रम को उसी तथ्यात्मक संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जो पुलिस जांच में सामने आया है।
पत्रकारों से की तथ्यों की पुष्टि की अपील
राजनांदगांव पुलिस ने इस मामले के साथ पत्रकारों और मीडिया संस्थानों से भी अपील की है कि संवेदनशील घटनाओं से जुड़ी खबरों को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले पुलिस अथवा किसी अधिकृत स्रोत से तथ्यों की पुष्टि जरूर की जाए। पुलिस का कहना है कि अपुष्ट और तथ्यहीन समाचार प्रसारित होने से समाज में अनावश्यक अफवाह, भ्रम और भय की स्थिति पैदा हो सकती है। सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसी सूचनाएं तेजी से फैलती हैं, इसलिए किसी भी संवेदनशील मामले में सत्यापित जानकारी साझा करना आवश्यक है। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अफवाहों से बचने और किसी घटना से संबंधित अपुष्ट जानकारी को आगे प्रसारित नहीं करने की अपील की है। पुलिस के मुताबिक, केवल अधिकृत और सत्यापित जानकारी पर भरोसा किया जाना चाहिए। साथ ही किसी भी संवेदनशील घटना को लेकर तथ्य सामने आने तक भ्रामक दावे करने से बचना जरूरी है।