Raipur. रायपुर। सुकमा जिले के फूलबगड़ी थाना क्षेत्र के गोगुंडा इलाके में बीते गुरुवार को एरिया डॉमिनेशन के दौरान हुए IED विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हुई महिला कांस्टेबल का इलाज रायपुर के एक निजी अस्पताल में जारी है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा आज अस्पताल पहुंचे और घायल जवान का हालचाल जाना। विजय शर्मा ने अस्पताल पहुंचकर महिला कांस्टेबल से मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह से उसके साथ खड़ी है और उपचार में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने चिकित्सकों को निर्देश दिए कि घायल कांस्टेबल का इलाज सर्वोत्तम स्तर का हो और उनकी पूरी देखभाल सुनिश्चित की जाए।

इस दौरान डिप्टी सीएम ने चिकित्सकों से महिला कांस्टेबल की स्थिति और अब तक दिए गए उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी ली। डॉक्टरों ने बताया कि घायल कांस्टेबल की स्थिति फिलहाल स्थिर है और विशेषज्ञों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि कांस्टेबल अब पहले की तरह दौड़-भाग करने और अपनी ड्यूटी में शामिल होने में सक्षम होंगी। घायल कांस्टेबल कोंटा (सुकमा) की रहने वाली हैं और ड्यूटी के दौरान मात्र 5 किलोमीटर दूर IED विस्फोट की चपेट में आ गई थीं। यह घटना क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा बिछाई गई कई IED में से एक थी, जो कभी भी और कहीं भी धमाका कर सकती हैं। बस्तर के कई इलाकों में इस प्रकार की विस्फोटक घटनाओं में इंसान और जानवर में कोई भेद नहीं रहता, जिससे स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बल लगातार जोखिम में रहते हैं।

विजय शर्मा ने इस दौरान कहा कि राज्य सरकार न केवल घायल जवान के इलाज पर ध्यान दे रही है, बल्कि ऐसे घटनाओं को रोकने और नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए भी लगातार रणनीति बना रही है। उन्होंने कहा कि घायल कांस्टेबल की बहादुरी और तत्परता हर सुरक्षा बल के जवान के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सुकमा और बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों की हिंसा और IED विस्फोटों की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में सुरक्षा बलों की सतर्कता और मजबूत रणनीति कितनी महत्वपूर्ण है। ऐसे घटनाओं में न केवल सुरक्षा बलों की जान जोखिम में होती है, बल्कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी लगातार चुनौतीपूर्ण रहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सली हिंसा के खिलाफ केवल सुरक्षा बलों की ताकत ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और नागरिक जागरूकता भी जरूरी है। राज्य सरकार ने इन मामलों में उच्च स्तरीय निगरानी और प्रशिक्षण बढ़ाया है ताकि जवानों की सुरक्षा और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। विजय शर्मा के अस्पताल दौरे ने न केवल घायल कांस्टेबल के हौसले को बढ़ाया, बल्कि सुरक्षा बलों और आम जनता को यह संदेश भी दिया कि सरकार अपने जवानों के साथ हर परिस्थिति में खड़ी है। इसके अलावा, यह घटना यह भी
रेखांकित
करती है कि नक्सलियों की हिंसा की आलोचना करना और उनके अपराधों को उजागर करना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है। घायल कांस्टेबल के इलाज की निरंतर निगरानी और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता यह दिखाती है कि बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जवानों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोपरि है। इस घटना ने पूरे प्रदेश में सुरक्षा और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नई बहस को जन्म दिया है।
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