Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने ऑनलाइन शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर लोगों को ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने 59 लाख 87 हजार 994 रुपये की ठगी को अंजाम दिया था। मामले में पुलिस ने मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के महू से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, जिसने दिल्ली के एनआईआईटी से पढ़ाई की है।
प्रार्थिया ने दर्ज कराई रिपोर्ट
मामला तब सामने आया जब प्रार्थिया अल्पना जैन ने बिलासपुर के सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने उन्हें डिमेट अकाउंट खोलकर शेयर बाजार में निवेश कराने और अच्छा मुनाफा दिलाने का लालच दिया। आरोपियों ने शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए छोटे-छोटे लेन-देन किए और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश के नाम पर अपने खातों में ट्रांसफर करवा ली। इस तरह आरोपियों ने अलग-अलग तिथियों में विभिन्न बैंक खातों से करीब 59.87 लाख रुपये की ठगी की।
तकनीकी साक्ष्य से मिली सफलता
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए बिलासपुर रेंज पुलिस महानिरीक्षक डॉ. संजीव शुक्ला (IPS) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने एक विशेष टीम का गठन किया। टीम का नेतृत्व रेंज साइबर थाना बिलासपुर के निरीक्षक रविशंकर तिवारी ने किया। तकनीकी जांच और बैंक खातों की ट्रांजेक्शन डिटेल्स खंगालने के बाद पुलिस को आरोपियों की लोकेशन इंदौर जिले के महू में मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने दबिश देकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।
आरोपियों से बरामद सामग्री
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल किए गए सामान भी जब्त किए हैं। इनमें
4 मोबाइल फोन
7 एटीएम कार्ड
1 यूपीआई कार्ड
2 पैन कार्ड
1 चेकबुक
2 पासबुक
शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इन उपकरणों और दस्तावेजों का उपयोग गिरोह ठगी की रकम ट्रांसफर और कैश निकालने के लिए करता था।
गिरोह का काम करने का तरीका
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से संपर्क करता था। फिर उन्हें शेयर बाजार में निवेश और बेहतर मुनाफा कमाने का झांसा देकर फर्जी डिमेट अकाउंट खुलवाता था। आरोपियों ने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल इतनी चालाकी से किया कि पीड़ित को तब तक धोखे का अहसास नहीं होता था जब तक उनकी लाखों की रकम गायब नहीं हो जाती।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
बिलासपुर पुलिस ने बताया कि फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और संभावना है कि इस गिरोह ने देशभर में कई और लोगों को निशाना बनाया हो। पुलिस अब इनके अन्य नेटवर्क और बैंक खातों की जांच कर रही है। साथ ही आरोपियों के डिजिटल गैजेट्स से डेटा रिकवरी की जा रही है ताकि और पीड़ितों की पहचान की जा सके।
सख्त रुख में पुलिस
इस मामले पर बिलासपुर रेंज आईजी डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा कि साइबर अपराधों के खिलाफ पुलिस लगातार सक्रिय है। आम जनता से अपील की जाती है कि किसी भी अनजान व्यक्ति या प्लेटफॉर्म के झांसे में न आएं। उन्होंने कहा कि निवेश से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को पहले अच्छी तरह परखें और विश्वसनीय स्रोत से ही लेन-देन करें।