म्यूल अकाउंट की जांच में 21 राज्यों का साइबर फ्रॉड नेटवर्क उजागर
आरोपी गिरफ्तार
Surajpur. सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक म्यूल बैंक अकाउंट की जांच के दौरान 21 राज्यों तक फैले साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में करीब 150 अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी किए जाने और इन खातों में 113 करोड़ 32 लाख रुपये से अधिक का लेनदेन होने की जानकारी सामने आई है। मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि संस्था से जुड़ा एक अन्य व्यक्ति फरार बताया जा रहा है।
सूरजपुर थाना पुलिस को इस मामले की जानकारी आई4सी यानी भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के ज्वाइंट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन पोर्टल के माध्यम से मिली थी। पोर्टल पर उपलब्ध शिकायतों और बैंक खातों से संबंधित जानकारी की जांच करने पर साइबर धोखाधड़ी का व्यापक नेटवर्क सामने आया। इस नेटवर्क से जुड़े खातों के खिलाफ देश के 21 राज्यों में शिकायतें दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से प्राप्त रकम को कई बैंक खातों में भेजा गया था। जांच के दौरान ठगी की कुछ राशि सूरजपुर में संचालित एक म्यूल अकाउंट में पहुंचने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने संबंधित बैंक खाते, संस्था और उससे जुड़े लोगों की विस्तृत जांच शुरू की। म्यूल अकाउंट ऐसे खाते होते हैं, जिनका उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त रकम को जमा करने, निकालने या दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता है।
जांच में संबंधित म्यूल अकाउंट का संबंध डीएन चक्रधारी एजुकेशन डेवलपमेंट एसोसिएशन नामक संस्था से पाया गया। संस्था के नाम से भारतीय स्टेट बैंक की सूरजपुर शाखा में खाता संचालित था। पुलिस को जांच में खाते का संबंध देवनारायण चक्रधारी और महेश कुमार चक्रधारी से होने की जानकारी मिली। खाते में पहुंची रकम और उसके बाद किए गए लेनदेन की जांच के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई आगे बढ़ाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सूरजपुर पुलिस ने संस्था से जुड़े महेश कुमार चक्रधारी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी संस्था का सदस्य था और संस्था से जुड़े म्यूल बैंक अकाउंट की जांच के आधार पर उसकी भूमिका सामने आई। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उससे खाते के संचालन, रकम के लेनदेन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में पूछताछ की जा रही है।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी पहले भी साइबर फ्रॉड से जुड़े एक मामले में जेल में निरुद्ध रह चुका है। हालांकि, वर्तमान मामले में उसके बैंक खाते में साइबर अपराध से प्राप्त कुल कितनी रकम पहुंची और वह सीधे तौर पर कितने खातों से जुड़ा था, इसकी जांच अभी जारी है। पुलिस बैंक खाते के विवरण, लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है। मामले में देवनारायण चक्रधारी फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है। संभावित ठिकानों पर दबिश देने के साथ ही उसकी गतिविधियों और संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। मामले की जांच के दौरान सामने आए अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संस्था का बैंक खाता साइबर अपराधियों तक कैसे पहुंचा और उसके संचालन में किन लोगों ने सहायता की।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि गिरफ्तार आरोपी से जुड़े खाते में ठगी की कितनी राशि जमा हुई और इस रकम को बाद में किन खातों में स्थानांतरित किया गया। संदिग्ध लेनदेन की क्रमवार जांच कर रकम के अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। संबंधित बैंकों से भी खातों और लेनदेन की जानकारी मांगी जा सकती है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच फिलहाल जारी है और इसके आधार पर आगे अन्य गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। 21 राज्यों से जुड़ी शिकायतों, करीब 150 बैंक खातों और 113 करोड़ 32 लाख रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन वाले इस मामले ने साइबर अपराध के संगठित नेटवर्क की ओर संकेत किया है। सूरजपुर पुलिस अब स्थानीय म्यूल अकाउंट से जुड़े आरोपियों के माध्यम से नेटवर्क की अगली कड़ियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।