Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे साइबर जागृति अभियान के दूसरे सप्ताह में रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के नॉर्थ जोन ने बैंक ग्राहकों और कर्मचारियों को वित्तीय धोखाधड़ी एवं यूपीआई फ्रॉड से बचाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। थाना पंडरी और गुढ़ियारी क्षेत्र के विभिन्न बैंकों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 150 बैंक ग्राहकों एवं बैंक कर्मचारियों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया। साइबर अपराधों के लगातार बदलते तरीकों और डिजिटल लेनदेन के बढ़ते उपयोग को देखते हुए अभियान के द्वितीय सप्ताह में बैंकिंग तथा वित्तीय संस्थानों को केंद्र में रखा गया है। इसके अंतर्गत आम नागरिकों को बैंक खाते, एटीएम कार्ड, यूपीआई और इंटरनेट बैंकिंग से संबंधित धोखाधड़ी के तरीकों की जानकारी देकर उनसे बचने के आवश्यक उपाय बताए जा रहे हैं।
यह जागरूकता अभियान पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है। पुलिस उपायुक्त नॉर्थ जोन दीपमाला कश्यप और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त नॉर्थ जोन आदित्य पांडे के नेतृत्व में नॉर्थ जोन पुलिस विभिन्न बैंकों के प्रबंधन से समन्वय स्थापित कर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसी क्रम में पंडरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत मोवा स्थित भारतीय स्टेट बैंक में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें करीब 100 बैंक ग्राहकों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। पुलिस अधिकारियों ने उपस्थित लोगों को साइबर फ्रॉड के सामान्य तरीकों और अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले नए हथकंडों के बारे में विस्तार से बताया।
बैंक ग्राहकों को समझाया गया कि मोबाइल फोन पर मिलने वाला ओटीपी, यूपीआई पिन, डेबिट अथवा क्रेडिट कार्ड का सीवीवी नंबर और इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड पूरी तरह गोपनीय होता है। बैंक या किसी अन्य वैध संस्था का कर्मचारी फोन करके यह जानकारी नहीं मांगता। किसी अनजान व्यक्ति को ये जानकारियां देने से बैंक खाते से रकम निकाली जा सकती है। गुढ़ियारी थाना क्षेत्र के पहाड़ी चौक स्थित छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक में भी साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें करीब 50 बैंक ग्राहकों एवं बैंक कर्मचारियों को साइबर अपराध से बचने के तरीके बताए गए। लोगों को फर्जी वेबसाइट, संदिग्ध लिंक, क्यूआर कोड और यूपीआई भुगतान से संबंधित धोखाधड़ी के प्रति विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई।
कार्यक्रम में बताया गया कि क्यूआर कोड स्कैन करना आमतौर पर भुगतान करने के लिए होता है, रकम प्राप्त करने के लिए नहीं। ठग अक्सर इनाम, कैशबैक, रिफंड या भुगतान भेजने का झांसा देकर लोगों से क्यूआर कोड स्कैन करवाते हैं और यूपीआई पिन दर्ज कराते हैं। ऐसा करते ही पीड़ित के बैंक खाते से रकम कट सकती है। इसलिए बिना सत्यापन किसी क्यूआर कोड को स्कैन नहीं करना चाहिए। पुलिस ने लोगों को अनजान मोबाइल नंबर से भेजे गए लिंक पर क्लिक नहीं करने और संदिग्ध एप्लिकेशन डाउनलोड नहीं करने की समझाइश दी। साइबर अपराधी बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, पुलिसकर्मी या किसी परिचित व्यक्ति के रूप में संपर्क कर सकते हैं। वे खाते के बंद होने, केवाईसी अपडेट, बिजली कनेक्शन काटने या इनाम मिलने का डर और लालच दिखाकर गोपनीय जानकारी मांगते हैं।
बैंक ग्राहकों को सोशल मीडिया पर आने वाले फर्जी निवेश प्रस्तावों और कम समय में अधिक मुनाफा दिलाने के दावों से भी सावधान रहने के लिए कहा गया। किसी व्यक्ति या संस्था को रकम भेजने से पहले उसकी पहचान और बैंक संबंधी विवरण की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने की सलाह दी गई। जल्दबाजी अथवा दबाव में किया गया डिजिटल भुगतान नुकसान का कारण बन सकता है। नागरिकों को साइबर अपराध के प्रति स्वयं जागरूक रहने के साथ अपने परिजनों, मित्रों और परिचितों को भी इसकी जानकारी देने के लिए प्रेरित किया गया। विशेष रूप से बुजुर्गों और डिजिटल बैंकिंग की सीमित जानकारी रखने वाले लोगों को साइबर ठगी के तरीकों से अवगत कराने की अपील की गई। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के सोशल मीडिया पेज को फॉलो करने और साइबर जागरूकता अभियान से संबंधित क्यूआर कोड स्कैन कर अभियान से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया। पुलिस ने कहा कि जागरूकता और सतर्कता ही साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।