Durg. दुर्ग। मंत्रालय में नौकरी लगाने के नाम पर बड़े स्तर की धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए दुर्ग पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अंजोरा पुलिस चौकी की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पिता-पुत्र – भेषराम देशमुख (62 वर्ष) और रविकांत देशमुख (32 वर्ष) – को बस स्टैंड दुर्ग से पकड़ा। इनके खिलाफ मंत्रालय में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से करोड़ों की ठगी करने का आरोप है। साथ ही, धोखाधड़ी की रकम से खरीदे गए प्लॉट की रजिस्ट्री, बैंक पासबुक व डायरी जब्त की गई है। यह मामला 2 जुलाई 2022 का है, जब प्रार्थी संतराम देशमुख निवासी ग्राम चिरवार, थाना अर्जुन्दा, जिला बालोद ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अंजोरा निवासी भेषराम देशमुख, उसका पुत्र रविकांत तथा उनके साथी अरूण मेश्राम (राजनांदगांव) ने मिलकर मंत्रालय में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 5,00,000 रुपये लेकर ठगी की। इसके बाद अन्य लोगों से भी इसी तरह रकम लेकर धोखाधड़ी करने की शिकायतें सामने आईं।

पुलिस ने अपराध क्रमांक 363/2025 के तहत धारा 420, 34 भादवि के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान अन्य पीड़ितों लोमश देशमुख और हेमंत कुमार साहू ने भी आरोपियों के खिलाफ शिकायत दी, जिसमें नौकरी दिलाने के नाम पर नगद और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए रकम लेकर ठगी का आरोप लगाया गया। जांच में पाया गया कि आरोपी पिता-पुत्र और उनके साथी ने अब तक लगभग 70 लाख रुपये की ठगी की है। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अरूण मेश्राम के साथ मिलकर कई लोगों से मंत्रालय में चपरासी और बाबू के पद पर नियुक्ति दिलाने का वादा कर मोटी रकम वसूली। चपरासी के लिए 2,50,000 और बाबू के लिए 4,00,000 रुपये की दर से रकम ली जाती थी। आरोपियों ने बताया कि ठगी की रकम से उन्होंने ग्राम कुथरेल में 12 लाख रुपये का प्लॉट खरीदा। बाकी रकम को खर्च कर दिया।
 
पुलिस ने प्लॉट की रजिस्ट्री, बैंक पासबुक और डायरी जब्त कर ली है। अन्य दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट हुआ कि रकम का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन ट्रांसफर के माध्यम से लिया गया। पुलिस की घेराबंदी के दौरान आरोपियों को दुर्ग बस स्टैंड से पकड़ा गया। वहीं, उनके फरार साथी अरूण मेश्राम की तलाश जारी है। पुलिस ने बताया कि अरूण मेश्राम नेटवर्क का मुख्य संचालक है और जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर ज्यूडिशियल रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई अपराधियों के लिए चेतावनी है कि सरकारी नौकरी जैसे संवेदनशील विषय पर झूठे वादों से जनता को भ्रमित नहीं किया जाएगा। चौकी प्रभारी अंजोरा संतोष कुमार साहू, प्रधान आरक्षक सूरज पांडेय, आरक्षक राकेश सिंह, आर. टोमन देशमुख, बृजमोहन सिंह और योगेश चंद्राकर की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर धन लेने वाले लोगों से सतर्क रहें और ऐसी किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

जिला पुलिस कप्तान ने कहा कि जिले में अपराध और धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए पुलिस पूरी ताकत से काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, आम लोगों से सहयोग की अपील की गई है ताकि किसी और को इस तरह के अपराध का शिकार न होना पड़े। स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना की है। उन्होंने कहा कि नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोहों पर कठोर कार्रवाई से समाज में विश्वास का माहौल बनेगा। कई पीड़ितों ने पुलिस को भरोसा दिलाया कि वे आगे भी सहयोग करेंगे ताकि ऐसे अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके। यह मामला न केवल दुर्ग जिले बल्कि पूरे प्रदेश में जागरूकता फैलाने का उदाहरण बन गया है। पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। वहीं, यह घटना उन गिरोहों के लिए चेतावनी है जो नौकरी जैसे संवेदनशील विषय पर जनता को भ्रमित कर आर्थिक लाभ कमाने की कोशिश कर रहे हैं।
Tags: