शराबी ड्राइविंग पर कोर्ट का सख्त फैसला, चार मौतों पर चालक को 20 वर्ष की सजा
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Gaurela-Pendra-Marwahi. गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। शराब के नशे में तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाकर चार लोगों की मौत के मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने आरोपी चालक स्नेहिल गुप्ता को कुल 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी है। अदालत ने चारों मौतों के लिए आरोपी को अलग-अलग जिम्मेदार मानते हुए यह सजा तय की है। फैसला सुनाए जाने के बाद आरोपी को तत्काल हिरासत में लेकर जिला जेल भेज दिया गया।
यह मामला 15 जून 2025 की रात लगभग 10 से 11 बजे के बीच पेण्ड्रा थाना क्षेत्र के ग्राम सेंवरा स्थित श्रीवास किराना दुकान के पास हुआ था। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी स्नेहिल गुप्ता अपने ब्रेजा कार (क्रमांक CG-31 B-2536) को अत्यधिक शराब के नशे में तेज रफ्तार से चला रहा था। इसी दौरान उसने सामने से आ रही दो मोटरसाइकिलों को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे मौके पर ही चार युवकों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान भूपेन्द्र सिंह मरावी, रामअवतार उदय, गंगाराम गंधर्व और शानू केंवट के रूप में हुई थी। बताया गया कि चारों मृतक एक दशगात्र कार्यक्रम से लौटकर अपने घर जा रहे थे, तभी यह दर्दनाक हादसा हुआ।
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि यह आरोपी का पहला अपराध है, इसलिए सजा में नरमी बरती जाए। वहीं, अभियोजन पक्ष ने अदालत से अधिकतम सजा की मांग करते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही समाज में गंभीर संदेश देती है और ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी है। अपर लोक अभियोजक ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी को यह पूरी जानकारी थी कि शराब के नशे में वाहन चलाना खतरनाक है और इससे जानमाल का नुकसान हो सकता है, इसके बावजूद उसने लापरवाही से वाहन चलाया। अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए बचाव पक्ष की मांग को खारिज कर दिया।
न्यायाधीश ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि आरोपी ने जानबूझकर जोखिम भरा व्यवहार किया, जिससे चार निर्दोष लोगों की जान चली गई। ऐसी स्थिति में केवल न्यूनतम सजा देना न्यायसंगत नहीं होगा। यह फैसला सड़क सुरक्षा और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने भी इस निर्णय को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि इससे भविष्य में ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में न्यायालय का यह निर्णय एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।