Raipur रायपुर। छत्तीसगढ़ में CGPSC और DMF घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा कदम उठाया है। कस्टोडियल रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद ED ने दोनों मामलों के आरोपियों को विशेष कोर्ट में पेश किया, जहां से उत्कर्ष चंद्राकर और सतपाल सिंह छाबड़ा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। ED ने दोनों आरोपियों की रिमांड बढ़ाने के लिए आवेदन नहीं किया। इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया।
CGPSC घोटाले की जांच में ED की ओर से कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है। ED के वकील सौरभ पांडेय के अनुसार, जांच में सामने आया कि अभ्यर्थियों को परीक्षा के पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर लाखों रुपये लिए गए। जांच के दौरान एक महिला अभ्यर्थी का बयान दर्ज किया गया है। महिला ने दावा किया कि उसे प्रीलिम्स परीक्षा का पेपर पहले उपलब्ध कराया गया था और परीक्षा में पूछे गए सवाल उस पेपर से पूरी तरह मेल खाते थे।
ED के मुताबिक, इसके बाद मेन्स परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर महिला से करीब 70 लाख रुपये लिए गए। हालांकि, परीक्षा के दौरान उपलब्ध कराया गया कथित पेपर वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल नहीं खाया। जांच एजेंसी का कहना है कि ऐसे और भी अभ्यर्थियों से पैसे लेने की जानकारी सामने आई है। मामले से जुड़े कई लोगों को पूछताछ के लिए समन जारी किए गए हैं। हालांकि, जांच प्रभावित न हो, इसलिए अभी उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
ED ने बताया कि समन किए गए लोगों के बयान दर्ज किए जाएं गे और यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसी का लक्ष्य करीब 60 दिनों में जांच पूरी कर प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल करना है। ED का कहना है कि सरकारी नौकरी की परीक्षा में गड़बड़ी कर अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करना गंभीर अपराध है।
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