पांडुलिपि सर्वेक्षण की प्रगति का कलेक्टर विनय लंगेह ने लिया जायजा

छग

Update: 2026-04-24 14:33 GMT
Mahasamund. महासमुंद। जिले में चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान की प्रगति का जायजा लेने कलेक्टर विनय कुमार लंगेह गुरुकुल कोसरंगी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने वहां के पुस्तकालय में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन किया और अभियान की स्थिति की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पुस्तकालय में सुरक्षित रखी गई 44 प्रकार की पांडुलिपियों का सूक्ष्म अध्ययन किया, जिनमें लगभग 3000 पृष्ठ शामिल हैं। इन पांडुलिपियों में भोजपत्र, ताड़पत्र और बांस पर लिखित प्राचीन ग्रंथ सुरक्षित हैं। इनमें रामायण के सभी कांड, चारों वेद और आयुर्वेद से जुड़े महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल हैं, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा को दर्शाते हैं।

कलेक्टर श्री लंगेह ने इस कार्य के लिए गुरुकुल के आचार्यों और संबंधित टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल प्राचीन ज्ञान और लिपियों को डिजिटल रूप में संकलित कर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने का माध्यम बनेगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे “ज्ञान भारतम” ऐप डाउनलोड कर इस अभियान से जुड़ें और अपने आसपास उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों की जानकारी साझा करें। कलेक्टर ने बताया कि यदि किसी के पास 100 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियां हैं, तो उन्हें जमा करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उनकी फोटो लेकर ऐप में अपलोड करना ही पर्याप्त है। जिला संयोजक एवं डीएमसी रेखराज शर्मा ने बताया कि “ज्ञान भारतम” ऐप के माध्यम से सर्वेक्षण की प्रक्रिया बेहद सरल बनाई गई है।

इसमें चार मुख्य चरण शामिल हैं, मिशन एवं सेटअप, सर्वेक्षण प्रारंभ करना, विवरण दर्ज करना और सबमिशन व ट्रैकिंग। उपयोगकर्ता मोबाइल नंबर या ईमेल के जरिए लॉगिन कर सकते हैं और सटीक जानकारी के लिए लोकेशन एक्सेस देना जरूरी होता है। उन्होंने यह भी बताया कि सर्वेक्षण के दौरान भाषा का चयन उपयोगकर्ता अपनी सुविधा अनुसार कर सकते हैं, लेकिन विवरण अंग्रेजी में दर्ज करना अनिवार्य है, ताकि डेटा संकलन में आसानी हो सके। इसके अलावा संकुल समन्वयकों के माध्यम से भी आवश्यक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे, बीआरसीसी जागेश्वर सिन्हा, गुरुकुल के प्राचार्य आचार्य मुकेश कुमार सहित अन्य शिक्षक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। प्रशासन का मानना है कि इस अभियान के माध्यम से जिले में बिखरी हुई प्राचीन पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण संभव होगा और उन्हें संरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकेंगे। यह प्रयास न केवल सांस्कृतिक धरोहर को बचाने में मदद करेगा, बल्कि शोध और शिक्षा के क्षेत्र में भी उपयोगी साबित होगा।
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