छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण को लेकर कलेक्टर ने ली बैठक

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Update: 2026-01-27 13:59 GMT
Raipur. रायपुर। मानसिक स्वास्थ्य संकट की बढ़ती गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में शैक्षणिक संस्थानों, कोचिंग संस्थानों, कॉलेजों एवं प्रशिक्षण केन्द्रों में अध्ययनरत छात्रों और युवाओं में असफलता अथवा अन्य कारणों से बढ़ती आत्महत्याओं की रोकथाम हेतु ठोस और समन्वित प्रयासों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, आदिवासी विकास, समाज कल्याण, पुलिस, स्वास्थ्य, बाल संरक्षण विभागों के अधिकारियों के साथ नागरिक समाज के सदस्य एवं शिक्षाविद शामिल रहे।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार सभी शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े ‘उम्मीद’ मसौदा दिशा-निर्देश लागू किए जाएंगे। इसके अंतर्गत 100 या अधिक छात्र संख्या वाले संस्थानों में प्रशिक्षित काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी, वहीं कम छात्र संख्या वाले संस्थान बाह्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से रेफरल व्यवस्था स्थापित करेंगे। सभी शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और आत्महत्या रोकथाम हेल्पलाइनों हेतु त्वरित रेफरल प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे। NCERT के ‘मनोदर्पण’ पोर्टल के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी तथा हेल्पलाइन नंबर 8448440632 का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
इसके साथ ही शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों को मानसिक स्वास्थ्य संकेतों की पहचान एवं प्राथमिक सहायता हेतु नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा। विद्यार्थियों के लिए करियर परामर्श, खेल, कला एवं व्यक्तित्व विकास गतिविधियों को प्राथमिकता देने तथा शैक्षणिक दबाव कम करने तथा अन्य दिशा-निर्देशों पर भी चर्चा की गई। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।रायपुर, 27 जनवरी 2026।
छात्रों और युवाओं में बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट और आत्महत्या की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निगरानी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों, कोचिंग सेंटरों, कॉलेजों एवं विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण तथा आत्महत्या जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस, व्यावहारिक और समन्वित रणनीति तैयार करना था। बैठक में शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, आदिवासी विकास, समाज कल्याण, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, बाल संरक्षण इकाई के अधिकारी, नागरिक समाज के प्रतिनिधि, शिक्षाविद एवं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे। बैठक के दौरान छात्रों में असफलता के डर, अत्यधिक शैक्षणिक दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं की चिंता, सामाजिक अपेक्षाएं और मानसिक तनाव जैसे कारणों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य अब केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सभी शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े ‘उम्मीद’ मसौदा दिशा-निर्देशों को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। इसके अंतर्गत 100 या उससे अधिक छात्र संख्या वाले सभी शैक्षणिक संस्थानों में प्रशिक्षित काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी। वहीं, कम छात्र संख्या वाले संस्थानों को बाह्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से रेफरल व्यवस्था विकसित करनी होगी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और आत्महत्या रोकथाम से संबंधित त्वरित रेफरल प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे। विद्यार्थियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए NCERT के ‘मनोदर्पण’ पोर्टल के माध्यम से काउंसलिंग सुविधा प्रदान की जाएगी। साथ ही आत्महत्या रोकथाम हेल्पलाइन नंबर 8448440632 का विद्यालयों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों को मानसिक तनाव, अवसाद, आत्मघाती प्रवृत्ति जैसे संकेतों की पहचान एवं प्राथमिक मानसिक सहायता प्रदान करने हेतु नियमित प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षक और स्टाफ विद्यार्थियों के साथ प्रत्यक्ष संपर्क में रहते हैं, इसलिए उनकी भूमिका बेहद अहम है।
बैठक में छात्रों के लिए करियर परामर्श, खेल, कला, सांस्कृतिक गतिविधियों और व्यक्तित्व विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया, ताकि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़े और शैक्षणिक दबाव कम हो। इसके साथ ही परीक्षा और परिणाम आधारित तनाव को कम करने के लिए संस्थानों को सहयोगात्मक और संवेदनशील वातावरण विकसित करने के निर्देश दिए गए। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। बैठक में यह संकल्प लिया गया कि जिले में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण के लिए सतत निगरानी, नियमित समीक्षा और सामूहिक प्रयास किए जाएंगे।
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