New Delhi. नई दिल्ली। झीरम घाटी मामले को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और पीड़ित परिवारों के सदस्यों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। 10 जनपथ में हुई बैठक करीब 45 मिनट चली। इसमें मामले में आगे की कानूनी रणनीति और झीरम हमले से पहले सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर चर्चा हुई। इससे पहले भी कांग्रेस ने एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद कानूनी विकल्पों पर विचार करने और केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा करने की बात कही थी। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव समेत पीड़ित परिवारों के सदस्य शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी के सामने मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं को रखा।



बैठक में झीरम हमले से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान उपलब्ध कराई गई सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जानकारी जुटाने की बात सामने आई। झीरम हमला परिवर्तन यात्रा के चौथे चरण में हुआ था। ऐसे में इससे पहले यात्रा के तीन चरणों में कहां, कब और कितनी सुरक्षा दी गई थी, इसकी जानकारी जुटाने पर चर्चा हुई।
टीएस सिंहदेव
पहले भी सार्वजनिक रूप से हमले वाले दिन यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठा चुके हैं। मामले में आगे की कानूनी रणनीति तैयार करने के लिए वरिष्ठ वकीलों से सलाह लेने की बात भी कही गई है। कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा से कानूनी राय लिए जाने की संभावना बताई गई है। हालांकि वकील नियुक्त करने को लेकर अभी आधिकारिक निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।


बैठक के बाद टीएस सिंहदेव ने कहा कि राहुल गांधी को झीरम मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी गई। सिंहदेव के अनुसार, मामले में जिन 10 लोगों को दोषी ठहराया गया, उनके अलावा साजिश से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच को लेकर भी सवाल हैं। विशेष एनआईए अदालत ने सितंबर 2026 में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया और बाद में उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। सिंहदेव ने दावा किया कि एनआईए की जांच में साजिश के पहलू की पर्याप्त जांच नहीं हुई। उन्होंने रिपोर्ट के एक हिस्से का उल्लेख करते हुए नंदकुमार पटेल और उनके बेटे की पहचान से संबंधित पूछताछ का मुद्दा भी बैठक में रखे जाने की बात कही। ये कांग्रेस नेताओं के दावे हैं और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया में इन पहलुओं पर क्या रुख अपनाया जाएगा, यह अभी स्पष्ट होना बाकी है।


सिंहदेव के मुताबिक, राहुल गांधी से कानूनी मदद और आगे उपलब्ध विकल्पों पर चर्चा की गई। बैठक में वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों से राय लेने के साथ मामले से जुड़े दस्तावेज और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी एकत्र करने पर जोर दिया गया। झीरम घाटी हमला 2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान हुआ था। इस हमले में 27
लोगों की मौत
हुई थी और 38 लोग घायल हुए थे। मामले में 13 साल बाद विशेष एनआईए अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया। एनआईए कोर्ट के हालिया फैसले के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस और पीड़ित परिवारों ने आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज की है। 19 सितंबर को रायपुर में भी कांग्रेस नेताओं और पीड़ित परिवारों की बैठक हुई थी, जिसमें कानूनी विकल्पों और आगे की रणनीति पर विचार किया गया था। अब दिल्ली में राहुल गांधी के साथ हुई बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं की ओर से मामले से संबंधित दस्तावेजों, पूर्व सुरक्षा व्यवस्था और कानूनी विकल्पों पर आगे विचार किए जाने की बात कही गई है।
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