Bilaspur. बिलासपुर। जिले के मल्हार स्थित नवोदय विद्यालय में पढ़ने वाले कक्षा दसवीं के छात्र की निमोनिया से मौत हो गई। तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में इलाज के दौरान छात्र ने दम तोड़ दिया। छात्र के परिजनों ने नवोदय विद्यालय प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही, अनदेखी और हॉस्टल की बदहाल व्यवस्था को मौत की बड़ी वजह बताया है। इस घटना ने विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, बेलगहना निवासी 16 वर्षीय हर्षित यादव मल्हार नवोदय विद्यालय में कक्षा 6 से ही पढ़ रहा था और हॉस्टल में ही रहकर पढ़ाई करता था। बताया जाता है कि हर्षित की तबीयत एक दिन पहले अचानक खराब हुई, जिसके बाद नवोदय स्कूल की ओर से परिजनों को फोन कर जानकारी दी गई। सूचना मिलने पर हर्षित के पिता जयप्रकाश तत्काल विद्यालय पहुंचे।
परिजनों ने बताया कि हर्षित की हालत अत्यंत खराब थी और उसे तुरंत इलाज की जरूरत थी। इसके बाद परिजन उसे बिलासपुर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां जांच में चिकित्सकों ने उसे निमोनिया बताया। प्राथमिक उपचार के बाद हालत स्थिर होने पर डॉक्टरों ने उसे घर भेज दिया। लेकिन अगले ही दिन फिर उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। हर्षित बेहोश हो गया, जिसके बाद परिवार उसे दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचा। इस बार उसे आईसीयू में भर्ती किया गया, लेकिन स्थिति लगातार खराब होती गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हर्षित की मौत के बाद परिजन सदमे में हैं और नवोदय विद्यालय प्रबंधन पर सीधे तौर पर आरोप लगा रहे हैं कि समय रहते उचित चिकित्सा उपलब्ध नहीं कराई गई। छात्र के पिता जयप्रकाश का कहना है कि हर्षित तीन दिनों से अस्वस्थ था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उसकी स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया। “अगर सही समय पर बच्चे का इलाज कराया जाता, तो उसकी जान बच सकती थी,” उन्होंने कहा।
परिजनों ने हॉस्टल की दुर्दशा को भी छात्र के स्वास्थ्य बिगड़ने की एक बड़ी वजह बताया। पिता जयप्रकाश ने कहा कि हॉस्टल की स्थिति बेहद खराब है। कमरों में खिड़की-दरवाजे नहीं हैं, बाथरूम में लगातार पानी बहता रहता है, दीवारें सीलन से भरी हैं और आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में बच्चों का बीमार होना आम बात है और प्रबंधन इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा। स्थानीय लोगों और छात्रों के परिजनों का भी कहना है कि हॉस्टल में साफ-सफाई की स्थिति लंबे समय से खराब है, लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद सुधार नहीं किया गया। परिजनों ने नवोदय विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और संपूर्ण मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि हर्षित की मौत सिर्फ बीमारी की वजह से नहीं, बल्कि प्रबंधन की लापरवाही का परिणाम है। इधर, घटना के बाद प्रबंधन की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन स्कूल स्रोतों ने माना कि छात्र की तबीयत अचानक बिगड़ी थी। मामला बढ़ने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से भी जांच की मांग की जा रही है। हर्षित की मौत से परिवार, छात्र समुदाय और स्थानीय लोग बेहद व्यथित हैं। यह घटना नवोदय विद्यालय के हॉस्टल की स्थिति और प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यदि शीघ्र जांच और सुधार नहीं किए गए, तो ऐसी घटनाएं भविष्य में भी दोहराए जाने का खतरा बना रहेगा।