Korba. कोरबा। जिले के राजगामार चौकी क्षेत्र से सामने आए महिला पंच के कथित अपहरण का मामला जांच में पूरी तरह झूठा निकला है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिस परिवार के अपहरण का आरोप लगाया गया था, वह दरअसल अपने रिश्तेदार के यहां घूमने गया था। यह मामला ग्राम पंचायत करूमौहा में सरपंच के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ा हुआ है, जिससे घटना ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था। जानकारी के अनुसार, ग्वाल राम यादव नामक व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि 16 मार्च को वार्ड क्रमांक 4 की पंच निर्मला, उनके पति दिलमोहन और दो बच्चों को ग्राम पंचायत करूमौहा की सरपंच कविता कांदे सहित अन्य लोगों ने जबरन एक सफेद टाटा पंच वाहन में बैठाकर ले जाया गया। शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपियों में लक्ष्मीनारायण खांडे, अंतुलाल रात्रे, गंगा राम रात्रे, चैतराम मंझवार, छबिराम मंझवार और चंद्रकुमारी रात्रे शामिल हैं।
शिकायत के मुताबिक, पूछताछ करने पर बताया गया था कि सभी लोग चंद्रहासिनी देवी के दर्शन के लिए जा रहे हैं और शाम तक लौट आएंगे। लेकिन तीन दिन तक परिवार के नहीं लौटने और संपर्क नहीं होने पर अपहरण की आशंका जताई गई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी के नेतृत्व में टीम ने संबंधित लोगों से पूछताछ की और तकनीकी व स्थानीय स्तर पर जांच की। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि कथित रूप से अपहृत परिवार वास्तव में अपने एक रिश्तेदार के घर गया हुआ था और अपहरण जैसी कोई घटना नहीं हुई थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, परिवार के लौटने के बाद उनके बयान दर्ज किए जाएंगे और पूरी स्थिति स्पष्ट की जाएगी। साथ ही झूठी शिकायत और अफवाह फैलाने के पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
यह पूरा मामला ग्राम पंचायत करूमौहा में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ा हुआ है। दरअसल, बीते वर्ष हुए पंचायत चुनाव में कविता कांदे सरपंच चुनी गई थीं। इसके बाद कुछ पंचों ने उन पर मनमानी और विकास कार्यों में बाधा डालने के आरोप लगाए और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया। इस प्रस्ताव पर मतदान के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा 25 मार्च की तारीख निर्धारित की गई है। ऐसे में अपहरण की शिकायत को लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि मामला राजनीतिक दबाव बनाने या माहौल प्रभावित करने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। हालांकि पुलिस ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है और जांच जारी होने की बात कही है। घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए हड़कंप की स्थिति बन गई थी, लेकिन पुलिस की त्वरित जांच ने सच्चाई सामने ला दी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि बिना पुष्टि के इस तरह की अफवाहें न फैलाएं, क्योंकि इससे अनावश्यक तनाव और भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि संवेदनशील मुद्दों पर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय तथ्यों की पुष्टि जरूरी होती है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर शिकायत की गंभीरता से जांच की जाती है और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।