CG: जंगलों में फल-फूल रहा करोड़ों का जुआ साम्राज्य, हरिराम साहू का नेटवर्क बेखौफ

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Update: 2025-12-06 18:08 GMT

Korba. कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के जंगलों में अवैध जुआ-सट्टे का कारोबार इस समय चरम पर है। गोढ़ी, चाकामार और कोरकोमा के जंगलों में रात-दिन लाखों रुपये का जुआ खेला जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की कथित मिलीभगत और अनदेखी के कारण यह काला कारोबार बेखौफ फल-फूल रहा है। इस पूरे मामले ने न केवल कानून-व्यवस्था की तस्वीर को कमजोर किया है, बल्कि जनता के बीच पुलिस पर भरोसे को भी हिला दिया है।

सूत्रों के अनुसार, जंगलों में बावन परी जैसे खेलों के तहत जुआ-सट्टा खुलेआम चल रहा है। संचालक हर घंटे 50 हजार रुपये तक की कमाई कर रहे हैं, जबकि जुआ खेलने वाले हर व्यक्ति से 500 रुपये का प्रवेश शुल्क वसूला जा रहा है। जुआड़ी दूर-दराज़ के क्षेत्रों जैसे कोरबा, जांजगीर-चांपा, गेवरा, दीपका और उरगा से रोजाना बड़ी संख्या में जंगलों की ओर उमड़ते हैं। इस अवैध गतिविधि के कारण स्थानीय सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है और अपराध की आशंका बढ़ रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों की कथित ‘सेटिंग’ के कारण यह जुआ नेटवर्क खुलकर फल-फूल रहा है। औपचारिक छापेमारियों के बावजूद किसी बड़े नेटवर्क पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। इसी कारण जुआ-सट्टे की जड़ें मजबूत होती जा रही हैं और कानून-व्यवस्था चुनौतीपूर्ण स्थिति में है।

जंगलों में चल रहे जुआ साम्राज्य का कथित मास्टरमाइंड हरिराम साहू बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, हरिराम साहू जुआड़ियों के बीच दावा करता है कि वह पुलिस के विभिन्न थानों और साइबर सेल तक नियमित ‘महीना’ भेजता है। इसके अलावा, वह राजपत्रित अधिकारियों तक पैसे पहुंचाने का भी दावा करता है। हालांकि, न्यायधानी न्यूज़ नेटवर्क इस दावे की पुष्टि नहीं करता, लेकिन जनता का सवाल वाजिब है—इतनी शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

कोरबा एसपी सिद्धार्थ तिवारी की ईमानदार और सख्त छवि के बावजूद जुआ नेटवर्क पर पुलिस कार्रवाई न होने के कारण लोगों में संदेह है। सवाल उठता है कि क्या कोई दबाव या बड़ा खेल है, जिसके कारण पुलिस हरिराम साहू और उसके नेटवर्क पर कार्रवाई करने से हिचक रही है? 

स्थानीय ग्रामीणों ने इस अवैध नेटवर्क को खत्म करने के लिए ड्रोन निगरानी, मनी ट्रेल जांच और बड़े पैमाने पर छापेमारी की मांग की है। उनका कहना है कि बिना कठोर और त्वरित कार्रवाई के यह जुआ नेटवर्क न केवल सामाजिक माहौल को बर्बाद करेगा, बल्कि कानून-व्यवस्था की रीढ़ भी कमजोर करेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में खुलेआम चल रहे जुआ-सट्टे को रोकना बेहद आवश्यक है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह नेटवर्क बड़े पैमाने पर अपराध और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा। कोरबा के जंगलों में इस अवैध जुआ साम्राज्य की खुली बहस यह स्पष्ट करती है कि कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की सख्ती के दावे केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। जंगलों में चल रहे जुए के अड्डों पर निगरानी, वित्तीय जांच और ठोस कार्रवाई के बिना यह समस्या और बढ़ती रहेगी
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