Mahasamund. महासमुंद। जिले के सांकरा थाना क्षेत्र में गांजा तस्करी के एक मामले में पुलिसकर्मी का नाम सामने आने से प्रशासन और आम लोगों में हड़कंप मच गया है। इस मामले में सांकरा पुलिस ने एक आरक्षक समेत तीन लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है, जबकि आरोपी आरक्षक पीयूष शर्मा अभी फरार है। इस मामले की पुष्टि एडिशनल एसपी महासमुंद ने की है। जानकारी के अनुसार, 3 मार्च 2026 को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने ओडिशा के बरगढ़ जिले के जगदलपुर निवासी टीटू उर्फ सोलन दास (38) को स्कूटी सहित पकड़ लिया। आरोपी के पास से पीले रंग के कैरी बैग में करीब 4.87 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ।
पूछताछ के दौरान आरोपी टीटू ने खुलासा किया कि 1 मार्च को बसना थाना में पदस्थ आरक्षक पीयूष शर्मा और अखराभांठा निवासी धर्मेंद्र सोनी ने उसे करीब 18 किलोग्राम गांजा दिया था। इस खुलासे के बाद सांकरा पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान धर्मेंद्र सोनी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया, जबकि आरक्षक पीयूष शर्मा फरार बताया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 18.47 किलोग्राम गांजा (कीमत लगभग 9 लाख रुपए), एक बिना नंबर की स्कूटी (लगभग 80 हजार रुपए), आरक्षक पीयूष शर्मा की बुलेट बाइक (लगभग 1 लाख रुपए) और तीन मोबाइल फोन जब्त किए। जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 11.05 लाख रुपए आंकी गई है।
यह कोई पहला मामला नहीं है जब पुलिसकर्मी गांजा तस्करी में संलिप्त पाए गए हैं। दो माह पहले भी रक्षित केंद्र में पदस्थ आरक्षक चंद्रशेखर साहू को शिवरीनारायण पुलिस ने 15.700 किलोग्राम गांजा के साथ गिरफ्तार किया था। इस मामले में 6 फरवरी 2026 को एसपी ने आरक्षक को बर्खास्त कर दिया था। सांकरा पुलिस ने बताया कि लगातार पुलिसकर्मियों के नाम गांजा तस्करी के मामलों में सामने आने से विभाग की छवि प्रभावित हो रही है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि फरार आरक्षक पीयूष शर्मा की तलाश में टीमों को विभिन्न ठिकानों पर तैनात किया गया है। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए संबंधित थानों में निगरानी और आंतरिक जांच तेज करने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस का कहना है कि आरोपी आरक्षक के नेटवर्क और अन्य संभावित संलिप्त लोगों की पहचान के लिए भी जांच जारी है। फरार आरक्षक की गिरफ्तारी पर पुलिस का जोर है और जनता से अपील की गई है कि कोई भी संदिग्ध जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें। इस घटना से यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर पुलिसकर्मी ही अवैध गतिविधियों में शामिल हो, तो कानून व्यवस्था और विभाग की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है। अधिकारी स्पष्ट कर रहे हैं कि ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और विभाग की छवि सुधारने के प्रयास तेज होंगे।