बस्तर अब बदल रहा, लाल आतंक खात्मे की ओर: CM साय

छग

Update: 2026-01-07 14:13 GMT
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि बस्तर अब निर्णायक रूप से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। लाल आतंक के खात्मे के साथ क्षेत्र शांति, विश्वास और विकास की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सुकमा जिले में ₹64 लाख के इनामी 26 हार्डकोर माओवादियों के आत्मसमर्पण को न केवल एक बड़ी सुरक्षा सफलता, बल्कि मानवीय विश्वास और पुनर्वास नीति की जीत बताया। आत्मसमर्पण करने वालों में 7 महिला माओवादी भी शामिल हैं, जो यह दर्शाता है कि हिंसा का रास्ता छोड़ने का संदेश अब समाज के हर वर्ग तक पहुंच रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सकारात्मक बदलाव माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के स्पष्ट संकल्प का परिणाम है। केंद्र और राज्य सरकार की संतुलित सुरक्षा रणनीति, सख्त कार्रवाई के साथ-साथ संवेदनशील पुनर्वास नीति, आज ज़मीन पर असर दिखा रही है। छत्तीसगढ़ में लागू “पूना मार्गेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान उन लोगों के लिए आशा की किरण बनकर उभरा है, जो कभी वामपंथी उग्रवाद के भ्रमजाल में फंस गए थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अंचल में लगातार नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सुदूर और दुर्गम इलाकों तक शासन की पहुंच, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी ढांचे के विकास ने क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है।

आज बस्तर में डर और बंदूक की आवाज़ नहीं, बल्कि भरोसे और भविष्य की उम्मीद की आवाज़ सुनाई दे रही है। ग्रामीणों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि सरकार उनकी सुरक्षा और विकास दोनों के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने लाल आतंक में भटके माओवादियों से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनके लिए दरवाज़े बंद नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हिंसा का रास्ता छोड़िए, सम्मान, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य की राह चुनिए। सरकार आपके साथ है और समाज आपको अपनाने के लिए तैयार है।” उन्होंने विश्वास जताया कि आत्मसमर्पण और पुनर्वास की यह प्रक्रिया आने वाले समय में और तेज़ होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर शांति की ओर निरंतर बढ़ रहा है और हर आत्मसमर्पण के साथ नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प और अधिक मजबूत हो रहा है। यह बदलाव केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई से नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और संवाद से संभव हुआ है।
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