Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर जारी शिक्षकों के आंदोलन के बीच बुधवार को सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। शिक्षामंत्री गजेंद्र यादव ने शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों से करीब आधे घंटे तक चर्चा की। बैठक में विभागीय TET आयोजित करने पर सहमति बनी है। इसके तहत केवल विभाग में कार्यरत शिक्षक ही शामिल होंगे। यह परीक्षा सामान्य TET से अलग होगी और शिक्षा विभाग के स्तर पर आयोजित की जाएगी। शिक्षामंत्री ने विभागीय TET को लेकर अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रिया तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं। माना जा रहा है कि विभाग अब परीक्षा की रूपरेखा, पात्रता, आयोजन और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को लेकर आगे काम करेगा। शिक्षक संगठनों ने बैठक में इसे अपने आंदोलन की प्रमुख मांगों में से एक बताया।
पदोन्नति में TET की अनिवार्यता पर विधि विभाग से राय
बैठक के दौरान शिक्षकों ने पदोन्नति में TET की अनिवार्यता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। शिक्षामंत्री गजेंद्र यादव ने इस संबंध में कहा कि अंतिम निर्णय से पहले विधि विभाग से चर्चा करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विधि विभाग से राय मिलने के बाद ही पदोन्नति में TET की अनिवार्यता को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सेवा की सुरक्षा और पदोन्नति के लिए कार्यरत शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता को समाप्त किया जाना चाहिए। इस मुद्दे को लेकर प्रदेशभर के शिक्षक लंबे समय से मांग उठा रहे हैं।
वित्तीय मांगों पर भी हुई चर्चा
बैठक में शिक्षक संगठनों ने अपनी विभिन्न वित्तीय मांगें भी शिक्षामंत्री के सामने रखीं। शिक्षकों ने वेतन विसंगति दूर करने, वित्तीय लाभ और अन्य सेवा संबंधी मांगों पर सरकार से ठोस पहल की मांग की। इस पर शिक्षामंत्री ने आश्वासन दिया कि वित्तीय मामलों को लेकर जल्द ही वित्त मंत्री से चर्चा की जाएगी। शिक्षकों ने राज्य में केंद्रीय वेतनमान के अनुरूप लाभ देने और वेतन विसंगतियों को दूर करने का मुद्दा भी उठाया। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से इन मांगों को लेकर सरकार के समक्ष ज्ञापन और आंदोलन के माध्यम से ध्यान आकर्षित कराया जा रहा है।
25 अगस्त को प्रदेशभर में हुआ था आंदोलन
गौरतलब है कि TET की अनिवार्यता समेत विभिन्न मांगों को लेकर 25 अगस्त को प्रदेशभर में शिक्षकों ने आंदोलन किया था। आंदोलन के बाद सरकार की ओर से शिक्षक संगठनों को चर्चा के लिए बुलाया गया। 26 अगस्त को दोपहर एक बजे बैठक का समय निर्धारित किया गया था। बैठक में शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रांतीय संचालक एवं संयुक्त शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष केदार जैन, शालेय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे और टीचर्स एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष संजय शर्मा समेत अन्य शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। दोपहर करीब तीन बजे संगठनों के नेताओं ने शिक्षामंत्री से मुलाकात की। चर्चा करीब आधे घंटे तक चली।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
शिक्षक संगठनों की ओर से TET के अलावा कई अन्य मांगें भी सरकार के सामने रखी गई हैं। इनमें शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत देने, सेवा की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पदोन्नति में TET से छूट देने की मांग प्रमुख है। इसके साथ ही शिक्षकों ने पूर्व सेवा अवधि को जोड़कर पेंशन एवं अन्य सेवा लाभ देने की मांग रखी है। राज्य के शिक्षकों को केंद्रीय वेतनमान के समान लाभ देने और वेतन विसंगति दूर करने का मुद्दा भी उठाया गया। शिक्षकों ने 13 फरवरी 2026 के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में आवश्यक संशोधन करने की मांग की है, ताकि शिक्षकों के हित सुरक्षित रह सकें। इसके अलावा सेवा और पदोन्नति के लिए ब्रिज कोर्स के माध्यम से B.Ed. कराने संबंधी मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई है। बैठक के बाद विभागीय TET को लेकर मिली सहमति को शिक्षक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि पदोन्नति में TET की अनिवार्यता, वित्तीय मांगों और अन्य मुद्दों पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। शिक्षामंत्री ने इन मांगों पर आगे भी सकारात्मक और सार्थक चर्चा का आश्वासन दिया है।