बलौदाबाजार हिंसा मामले में अमित बघेल की जमानत याचिका खारिज

छग

Update: 2026-05-19 16:12 GMT
Balodabazar. बलौदाबाजार। बलौदाबाजार आगजनी और हिंसा मामले में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल को बड़ा कानूनी झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। अमित बघेल के खिलाफ आगजनी, हिंसा और तोड़फोड़ से जुड़े चार अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने इन्हीं मामलों में कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया था।
गौरतलब है कि 10 जून 2025 को बलौदाबाजार जिले में हिंसा और आगजनी की बड़ी घटना सामने आई थी। घटना के दौरान कई स्थानों पर उपद्रव, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुई थीं। हालात बिगड़ने के बाद पुलिस और प्रशासन को स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा था। घटना के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए थे।
जांच के दौरान पुलिस ने अमित बघेल की भूमिका को गंभीर मानते हुए उन्हें आरोपी बनाया और गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उनकी ओर से हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई थी। याचिका में अन्य आरोपियों को मिली जमानत का हवाला देते हुए समानता के आधार पर राहत देने की मांग की गई थी। हालांकि मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अमित बघेल को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले में अन्य आरोपियों से उनकी स्थिति अलग है और उनके खिलाफ कई अन्य आपराधिक मामले भी लंबित हैं। इसी आधार पर अदालत ने समानता का दावा स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि अमित बघेल के खिलाफ कुल 17 मामले लंबित हैं। वहीं सह आरोपी अजय यादव के खिलाफ 13 और दिनेश कुमार वर्मा के खिलाफ एक अन्य मामला दर्ज है। अदालत ने कहा कि लंबित मामलों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती। हालांकि हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मामले में संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी हो जाती है या आदेश की तारीख से एक वर्ष की अवधि पूरी हो जाती है, तो आरोपी दोबारा जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। अदालत के इस फैसले के बाद फिलहाल अमित बघेल को जेल में ही रहना होगा।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार बलौदाबाजार हिंसा मामले की जांच अभी जारी है। घटना में शामिल अन्य आरोपियों और उनकी भूमिकाओं की भी जांच की जा रही है। पुलिस लगातार डिजिटल साक्ष्य, वीडियो फुटेज और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया जा सके। इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा बनी हुई है। हिंसा और आगजनी की इस घटना को लेकर पहले भी कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और आगामी सुनवाई तथा जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
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