नाबालिग गांजा आरोपी रिहाई में रिश्वत का आरोप, हवलदार और आरक्षक सस्पेंड

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Update: 2026-02-16 14:48 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। कोटा थाना क्षेत्र में पुलिसकर्मियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। आरोप है कि गांजा बिक्री के मामले में पकड़े गए एक नाबालिग को थाने लाने के बाद कथित रूप से 80 हजार रुपये लेकर छोड़ दिया गया। इस गंभीर मामले की जानकारी मिलते ही बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह ने प्रधान आरक्षक प्रकाश दुबे और आरक्षक सोमेश्वर साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम को कोटा पुलिस टीम ने रानीसागर क्षेत्र में कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान टीम ने एक नाबालिग को पकड़ लिया, जिस पर गांजा बिक्री से जुड़ा होने का संदेह था। नाबालिग को पूछताछ के लिए थाने लाया गया। सूत्रों ने बताया कि नाबालिग का पिता गांव में गांजा बेचने का काम करता है। बेटे के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही पिता सक्रिय हो गया और पुलिसकर्मियों से संवाद के दौरान कथित रूप से रिश्वत का प्रस्ताव सामने आया।
पुलिस पर आरोप है कि नाबालिग को छोड़ने के लिए पहले 2 लाख रुपये की मांग की गई। सौदेबाजी के बाद यह राशि घटाकर 80 हजार रुपये तय की गई। परिजनों ने अपने गांव में ब्याज लेकर यह राशि इकट्ठा की और पुलिसकर्मियों को सौंप दी। इसके बाद नाबालिग को थाने से छोड़ दिया गया। सूत्रों ने बताया कि यह सौदा कोटा मुख्य चौक में एक जूता दुकान में रानीसागर पारा में नाबालिग के परिवार से हुआ। इसके बाद नाबालिग को थाने से मुक्त किया गया। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है। मामले में प्रारंभिक जांच के बाद SSP रजनेश सिंह ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रधान आरक्षक प्रकाश दुबे और आरक्षक सोमेश्वर साहू को निलंबित कर दिया। SSP ने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे सख्त कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही, इस मामले में थानेदार की लापरवाही और संलिप्तता के आरोपों पर कोटा टीआई नरेश चौहान को स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर पक्ष मांगा गया है। अधिकारियों का कहना है कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने स्थानीय समाज में भी चिंता और आक्रोश उत्पन्न किया है। नागरिकों ने कहा कि पुलिस द्वारा नाबालिगों और संवेदनशील मामलों में इस तरह की कथित भ्रष्ट गतिविधियां कानून-व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं। वहीं SSP रजनेश सिंह ने जनता को आश्वस्त किया कि सभी जांचें पारदर्शी ढंग से होंगी और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कोटा थाना मामला यह संकेत देता है कि नाबालिग अपराधियों से जुड़े मामलों में भी अधिकारियों की जवाबदेही और निगरानी अत्यंत महत्वपूर्ण है। SSP ने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रशासनिक दृष्टि से कठोर कदम उठाए जाएंगे और पुलिस टीमों की कार्यशैली की निगरानी को और प्रभावी बनाया जाएगा। इस घटना के बाद बिलासपुर पुलिस प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में चेतावनी जारी की है कि नाबालिगों और संवेदनशील मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसे किसी भी मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई हो।
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