Ambikapur. अंबिकापुर। स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के चर्चित Holy Cross Hospital परिसर का बताया जा रहा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर तिरंगे को फर्श पर पड़ा हुआ दिखाया गया है। वीडियो में एक सफाई कर्मी अस्पताल परिसर में पड़े भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को झाड़ू और कचरे के साथ हटाते हुए नजर आ रहा है। इस घटना को लेकर मरीजों के परिजनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।

परिजनों ने रोका, फिर भी नहीं रुकी कार्रवाई
जानकारी के अनुसार अस्पताल में मौजूद कुछ मरीजों के परिजनों ने सफाई कर्मी को तिरंगे के संबंध में जानकारी देते हुए उसे सम्मानपूर्वक उठाने की बात कही। आरोप है कि समझाने के बाद भी सफाई कर्मी ने लापरवाही बरतते हुए ध्वज को झाड़ू से हटाने की कोशिश की। इसके बाद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।


अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर उठे सवाल
मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी को लेकर उठ रहा है। लोगों का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व से पहले अस्पताल परिसर में राष्ट्रीय ध्वज के साथ इस तरह की लापरवाही बेहद गंभीर मामला है। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या अस्पताल प्रबंधन को इस घटना की जानकारी थी? अगर जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। वहीं यदि प्रबंधन को इसकी जानकारी नहीं थी तो अस्पताल की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। बताया जा रहा है कि मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

सोशल मीडिया पर लोगों में नाराजगी
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी जताई है। कई लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि तिरंगा देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। इसकी गरिमा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक और संस्थान की जिम्मेदारी है। फिलहाल इस पूरे मामले में आधिकारिक रूप से किसी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। वीडियो की सत्यता और घटना की पूरी परिस्थितियों को लेकर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सामने आए इस मामले ने राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और सार्वजनिक संस्थानों की जिम्मेदारी को लेकर एक नई चर्चा शुरू कर दी है।
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