Ambikapur. अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में करीब दो साल पुराने स्टील कारोबारी अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हत्या के आरोपी संजीव मंडल को दोषी ठहराते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही हथियार रखने के मामले में आरोपी को 5 साल के कारावास की सजा भी दी गई है। यह मामला अंबिकापुर के गांधी नगर थाना क्षेत्र का है। 21 अगस्त 2024 को अंबिका स्टील इंडस्ट्रीज के मालिक महेश केडिया के बेटे अक्षत अग्रवाल (23) का शव उनकी कार में मिला था। अक्षत के सीने में गोली लगी हुई थी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।
पुलिस जांच के दौरान कंपनी के पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से हथियार और अन्य सामान बरामद किए थे। मामले की जांच में आरोपी के पास से तीन पिस्टल और 31 कारतूस मिले थे। इसके अलावा पुलिस ने आरोपी के पास से 50 हजार रुपये नकद, अक्षत अग्रवाल की सोने की चेन, ब्रेसलेट और अंगूठी भी बरामद की थी। इन सबूतों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला मजबूत किया था।
आरोपी ने किया था अलग दावा
गिरफ्तारी के बाद आरोपी संजीव मंडल ने पुलिस के सामने अलग कहानी बताई थी। आरोपी का दावा था कि अक्षत अग्रवाल ने खुद अपनी हत्या की सुपारी दी थी। संजीव ने कहा था कि कारोबारी ने ही उसे हथियार उपलब्ध कराए थे और खुद को गोली मारने के लिए कहा था। आरोपी के अनुसार उसने अक्षत पर पिस्टल तानी, लेकिन गोली चलाने में हिचकिचाहट हुई। इसके बाद अक्षत ने खुद ट्रिगर दबा दिया, जिससे गोली उसके सीने में लगी। आरोपी ने यह भी दावा किया था कि बाद में उसने दो और फायर किए। हालांकि, कोर्ट की सुनवाई के दौरान आरोपी अपने पहले के बयान से पलट गया और खुद को निर्दोष बताया। उसने हत्या में अपनी भूमिका से इनकार किया।
33 लोगों की हुई गवाही
मामले की सुनवाई जिला कोर्ट के सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत में हुई। करीब दो साल तक चली सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों, जवानों, डॉक्टरों, फॉरेंसिक टीम, परिजनों और दोस्तों समेत कुल 33 लोगों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के सामने परिस्थितिजन्य साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक सबूत और अन्य महत्वपूर्ण तथ्य पेश किए। जांच में यह सामने आया कि घटना के समय अक्षत अग्रवाल और संजीव मंडल दोनों घटनास्थल पर मौजूद थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी सामने आया कि अक्षत को तीन गोलियां नजदीक से मारी गई थीं। इन साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी माना।
नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया गया था
पुलिस ने मामले की जांच के दौरान कोर्ट की अनुमति लेकर आरोपी संजीव मंडल का नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया था। हालांकि इन जांचों में कोई नया निर्णायक तथ्य सामने नहीं आया। पुलिस जांच में घटना में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि नहीं हुई। जांच से जुड़े तथ्यों और सबूतों को अदालत के सामने रखा गया।
कोर्ट का फैसला
अतिरिक्त सरकारी वकील विनोद कुमार दुबे ने बताया कि गांधीनगर पुलिस ने घटना के अगले दिन 22 अगस्त 2024 को ही आरोपी संजीव मंडल को हिरासत में ले लिया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत 5 साल के कारावास का आदेश दिया गया। इस फैसले के बाद अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुई है। पुलिस और अभियोजन पक्ष ने इसे महत्वपूर्ण सफलता बताया है।
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