बलात्कार मामले में आरोपी को 10 साल की सजा, फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला
छग
Raipur. रायपुर। अपर सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक विशेष न्यायाधीश अनीता ध्रुव की अदालत ने बलात्कार के एक मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने यह निर्णय गोबरा नवापारा थाना क्षेत्र में दर्ज एक गंभीर आपराधिक मामले की सुनवाई के बाद दिया। मामले के अनुसार, आरोपी राधेलाल यादव (22 वर्ष), निवासी हसदा नंबर-2, अभनपुर पर आरोप था कि उसने फरवरी 2025 की रात लगभग 11 बजे पीड़िता के घर में जबरन प्रवेश कर उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। घटना के बाद पीड़िता ने अपने परिजनों को जानकारी दी, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और गोबरा नवापारा थाना पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया।
पुलिस ने मामले में धारा 331(ख), 351(2) तथा धारा 64(1) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को आधार बनाकर चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से यह दावा किया गया कि पीड़िता नाबालिग थी और घटना के बाद वह गर्भवती भी हो गई थी। हालांकि न्यायालय में सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर यह तथ्य प्रमाणित नहीं हो सका कि पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी। इसी कारण अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 4 को लागू नहीं माना।
इसके बावजूद, अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपी ने पीड़िता के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए थे। अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी को धारा 64 के तहत दोषी करार दिया। फैसले में अदालत ने आरोपी राधेलाल यादव को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही पीड़िता को आर्थिक सहायता देने के संबंध में भी निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने प्रतिकार स्वरूप 4 लाख रुपये की राशि प्रदान करने की अनुशंसा की है, ताकि पीड़िता को सहायता मिल सके।
इस मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष की ओर से मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, जिसके आधार पर अदालत ने निर्णय सुनाया। फैसले के बाद न्यायिक प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। यह फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा समयबद्ध न्याय प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।