MCB. एमसीबी। जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान धान खरीदी ने भरोसे, पारदर्शिता और सुविधा की नई मिसाल कायम की है। जिले के 25 उपार्जन केंद्रों पर किसानों की लगातार बढ़ती उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि इस वर्ष की व्यवस्था पूरी तरह किसान-हितैषी साबित हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी की स्वीकृति सीमा और 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य का निर्णय किसानों के लिए संबल बनकर सामने आया है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिल रही है। किसान पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी उपज लेकर उपार्जन केंद्रों तक पहुंच रहे हैं और शासन की व्यवस्था पर उनका भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। धान खरीदी में लागू डिजिटल टोकन व्यवस्था किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। टोकन प्रणाली से अनावश्यक भीड़, समय की बर्बादी और असुविधा में कमी आई है। फोटो अपलोड सत्यापन, इलेक्ट्रॉनिक मापन और सुव्यवस्थित परिवहन व्यवस्था के चलते प्रत्येक किसान को सही तौल और पारदर्शी प्रक्रिया का लाभ मिल रहा है। धान विक्रय के बाद राशि का सीधे किसानों के बैंक खातों में भुगतान होने से पारदर्शिता और विश्वास का वातावरण बना है।
इस त्वरित भुगतान व्यवस्था ने ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को तेज किया है और बाजार में लेन-देन बढ़ा है, जिससे स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल रहा है। जिले के सभी 25 उपार्जन केंद्रों में आज खरीदी की प्रक्रिया पूरी तरह सुचारू रही। कुल 311 टोकन के माध्यम से 1526.20 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज की गई, जो किसानों की सक्रिय भागीदारी और समितियों की सजग कार्यप्रणाली को दर्शाती है। केल्हारी उपार्जन केंद्र ने 26 टोकन से 107.18 क्विंटल धान खरीदी कर जिले में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। इसके बाद कोड़ा केंद्र में 18 टोकन से 94.92 क्विंटल, माड़ीसरई में 21 टोकन से 92.20 क्विंटल, सिंगरौली में 19 टोकन से 91.12 क्विंटल, जनकपुर में 16 टोकन से 90.80 क्विंटल, कुंवारपुर में 16 टोकन से 86.44 क्विंटल, खड़गवां में 15 टोकन से 79.08 क्विंटल और डोड़की में 12 टोकन से 78.16 क्विंटल धान की खरीदी हुई। सभी केंद्रों पर व्यवस्था सुचारू रहने से किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। एमसीबी जिला इस वर्ष धान खरीदी के आंकड़ों में प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल होने की ओर तेजी से अग्रसर है। किसानों की बढ़ती सहभागिता और शासन की मजबूत व्यवस्था आने वाले दिनों में खरीदी को और अधिक गति देने का संकेत दे रही है।