खडियापाल में शेर ने मवेशी का शिकार किया, ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत

छग

Update: 2026-01-06 15:15 GMT
Jagdalpur. जगदलपुर। बस्तर जिले के तोकापाल ब्लॉक के खडियापाल क्षेत्र में शेर की सक्रियता को लेकर ग्रामीणों में डर का माहौल है। तीन दिन पहले शेर के पंजे के निशान मिलने की सूचना मिलने के बाद आज सुबह जंगल में एक मवेशी का क्षत-विक्षत शव देखा गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक अनुमान यही लगाया जा रहा है कि मवेशी का शिकार शेर ने ही किया है। घटना की जानकारी मिलते ही रेंजर राजकुमार मिश्रा ने ग्रामीणों को अलर्ट कर दिया। उन्होंने लोगों को अकेले घर से बाहर निकलने से मना किया और जंगल या खेत में काम करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी। रेंजर ने कहा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या शेर के दिखने की सूचना तुरंत वन विभाग को दी जाए, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

जानकारी के अनुसार, तीन दिन पहले खडियापाल क्षेत्र में शेर के पैर के निशान जंगल में पाए गए थे। ग्रामीणों ने इसे वन विभाग को सूचित किया था। वन विभाग ने मौके पर जाकर जांच की थी और तब लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई थी। लेकिन मंगलवार की सुबह मारेंगा के जंगल में मवेशी का शव मिलने के बाद शेर की सक्रियता और भी गंभीर रूप से सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार, यह क्षेत्र शेरों की आदत वाला जंगल है, लेकिन अब शेर ग्रामीण इलाके की ओर भी आना शुरू हो गया है। इससे ग्रामीणों में डर का माहौल पैदा हो गया है। कई लोग खेतों में अकेले जाने से डर रहे हैं। वन विभाग ने कहा कि फिलहाल शेर के मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है और ग्रामीणों को सुरक्षा निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि शेर के संकेत मिलने पर घबराने के बजाय शांत रहें और किसी भी परिस्थिति में अकेले जंगल में प्रवेश न करें। यदि किसी को शेर या किसी अन्य वन्य जीव के गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें। इसके अलावा विभाग शेर को जंगल की ओर वापस लौटाने और मानव-वन्य जीव संघर्ष से बचने के उपायों पर भी काम कर रहा है। स्थानीय लोग अब अपने बच्चों और बुजुर्गों को अकेले घर के बाहर नहीं जाने दे रहे हैं। इसके साथ ही मवेशियों को भी जंगल की ओर नहीं भेजा जा रहा है। ग्रामीणों की सतर्कता और वन विभाग की निगरानी से ही शेर और मानव के बीच संभावित संघर्ष को रोका जा सकेगा। वन विभाग ने कहा कि शेर का आदतन शिकार मवेशी या छोटे जानवर होता है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में आने से स्थिति गंभीर हो सकती है। इस प्रकार की घटनाओं में शिकार की संभावना और शेर की गतिविधियों पर निगरानी जरूरी है।
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