Kanker. कांकेर। कांकेर जिले में वन्य प्राणियों की बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। कभी भालू के हमले तो कभी तेंदुए की मौजूदगी के कारण वन क्षेत्र से लगे गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है। ताजा मामला जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर ग्राम डुमाली का है, जहां घर के बाहर बंधी एक गाय पर अचानक तेंदुए ने हमला कर दिया। तेंदुए ने गाय को अपना शिकार बनाने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान वहां से गुजर रहे कुछ चरवाहों की नजर घटना पर पड़ गई। चरवाहों ने शोर मचाकर तेंदुए को वहां से भगाया, जिसके बाद गाय की जान बच सकी। हालांकि, तेंदुए के हमले में गाय गंभीर रूप से घायल हो गई और उसके शरीर से खून निकलने लगा।
जानकारी के अनुसार, ग्राम डुमाली में एक किसान ने अपने घर के बाहर गाय को बांध रखा था। इसी दौरान पहाड़ी की ओर से एक तेंदुआ गांव की ओर आया और अचानक गाय पर झपट्टा मार दिया। गाय को संभलने का मौका भी नहीं मिला और तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया। हमले के दौरान गाय के शरीर पर गंभीर चोटें आईं। अचानक हुए इस हमले से गाय बुरी तरह घबरा गई और बचने के लिए संघर्ष करने लगी। इसी बीच वहां से कुछ चरवाहे गुजर रहे थे। उनकी नजर गाय और तेंदुए के बीच चल रही जद्दोजहद पर पड़ी। चरवाहों ने तत्काल शोर मचाना शुरू कर दिया। लोगों की आवाज सुनकर तेंदुआ घबरा गया और गाय को छोड़कर पहाड़ी की दिशा में भाग गया। चरवाहों की तत्परता के कारण गाय की जान बच गई। यदि समय पर लोगों की नजर नहीं पड़ती तो तेंदुआ गाय को अपना शिकार बना सकता था।
घटना के बाद गांव में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। ग्रामीण तेंदुए के आबादी वाले क्षेत्र के करीब पहुंचने से चिंतित नजर आए। लोगों का कहना है कि वन क्षेत्र से लगे गांवों में वन्य प्राणियों की आवाजाही कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब जिस तरह से तेंदुए और अन्य जंगली जानवर आबादी वाले इलाकों के करीब पहुंच रहे हैं, उससे इंसानों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ गया है। कांकेर जिले में पिछले कुछ समय से वन्य प्राणियों की गतिविधियां लगातार चर्चा में हैं। हाल के दिनों में भालुओं के हमलों की घटनाओं ने भी ग्रामीणों को डरा रखा है। जानकारी के अनुसार, भालू के हमलों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद ग्रामीण पहले से ही सतर्क हैं। अब ग्राम डुमाली में तेंदुए द्वारा मवेशी पर हमला किए जाने की घटना ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि वन्य प्राणियों की लगातार बढ़ती गतिविधियों के कारण शाम ढलने के बाद घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। खासकर जंगल और पहाड़ी इलाकों से लगे गांवों में लोग अकेले आने-जाने से बच रहे हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि मवेशियों के शिकार के लिए आबादी वाले क्षेत्र में आने वाले तेंदुए या अन्य जंगली जानवर कभी इंसानों पर भी हमला कर सकते हैं। ग्राम डुमाली की घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि वन विभाग की टीम वन्य प्राणियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे और यह पता लगाए कि तेंदुआ किस क्षेत्र से गांव के आसपास पहुंच रहा है। साथ ही आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास नियमित गश्त और निगरानी की व्यवस्था किए जाने की मांग की गई है।