बारनवापारा अभयारण्य में “बर्ड सर्वे 2026” का आयोजन, 200 से अधिक पक्षी प्रजातियों का हुआ रिकॉर्ड

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Update: 2026-01-18 12:57 GMT
Balodabazar. बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों में शामिल बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में 16 से 18 जनवरी 2026 तक “बर्ड सर्वे 2026” का सफल आयोजन किया गया। तीन दिवसीय इस सर्वे के दौरान अभयारण्य और उसके आसपास के क्षेत्रों में पक्षियों की समृद्ध विविधता देखने को मिली। अब तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस सर्वे में लगभग 202 विभिन्न पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है, जो क्षेत्र की जैव विविधता को दर्शाता है। इस बर्ड सर्वे में देश के 11 राज्यों महाराष्ट्र, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल,
तेलंगाना
, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान, केरल और कर्नाटक से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सर्वे में कुल 70 प्रतिभागी, 12 वॉलंटियर्स, पक्षी विशेषज्ञ, शोधकर्ता और वन्यजीव फोटोग्राफर्स सहित लगभग 100 लोगों की सक्रिय सहभागिता रही। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने अपने अनुभव और ज्ञान को साझा करते हुए पक्षी अवलोकन और पहचान की प्रक्रिया को और समृद्ध बनाया।
यह बर्ड सर्वे केवल बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके आसपास के कोठारी, सोनाखान और देवपुर परिक्षेत्रों में भी किया गया। इन क्षेत्रों को शामिल करने का उद्देश्य पूरे परिदृश्य स्तर पर पक्षी विविधता का आकलन करना था। सर्वे के दौरान प्रतिभागियों द्वारा एकत्र किए गए आंकड़े और प्रेक्षण वैश्विक पक्षी डाटाबेस का हिस्सा बनेंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस क्षेत्र की जैव विविधता को पहचान मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वैज्ञानिक सर्वे अभयारण्य क्षेत्र में जैव विविधता के दस्तावेजीकरण, बर्डिंग कल्चर को बढ़ावा देने और इको-पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे न केवल शोध और संरक्षण को बल मिलता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं।
सर्वे के दौरान कई दुर्लभ और आकर्षक पक्षी प्रजातियाँ प्रतिभागियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। इनमें सबसे उल्लेखनीय रही बार-हेडेड गूज, जो सामान्यतः मध्य एशिया के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्रजनन करती है और सर्दियों में भारत सहित दक्षिण एशिया के जलाशयों एवं खेतों में देखी जाती है। इसके अलावा आर्द्र घासभूमि, धान के खेतों, दलदली क्षेत्रों और नदी किनारे पाई जाने वाली ग्रे-हेडेड लैपविंग भी प्रमुख आकर्षण रही। शिकारी पक्षी प्रजातियों में पेरेग्रिन फाल्कन और यूरेशियन स्पैरोहॉक का अवलोकन किया गया, वहीं ब्लू-कैप्ड रॉक थ्रश और वन पारिस्थितिकी में बीज प्रसार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन पिजन की उपस्थिति ने सर्वे को और खास बना दिया। इन प्रजातियों का रिकॉर्ड क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को समझने में मददगार साबित होगा।
सर्वे में प्रमुख विशेषज्ञों के रूप में डॉ. हकीमुद्दीन एफ. सैफी, डॉ. जागेश्वर वर्मा, मोहित साहू और सोनू अरोरा की सहभागिता रही। इन विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को पक्षी पहचान, व्यवहार अध्ययन और डेटा संग्रह की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी। बर्ड सर्वे के संबंध में वनमंडलाधिकारी गणवीर धम्मशील ने बताया कि बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य सेंट्रल छत्तीसगढ़ की जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करता है, जहां मिश्रित वन, साल वन और विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिक परिदृश्य मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इस सर्वे से प्राप्त आंकड़े भविष्य में अभयारण्य की प्रबंधन कार्ययोजनाओं को तैयार करने में सहायक होंगे, विशेष रूप से उन पक्षी प्रजातियों के संरक्षण के लिए जिनकी संख्या में गिरावट देखी जा रही है।
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