उड़ीसा से छत्तीसगढ़ लाया जा रहा 60 कट्टा अवैध धान जब्त, आरोपी गिरफ्तार

छग

Update: 2025-11-20 14:51 GMT
Raigarh. रायगढ़। पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल के दिशा-निर्देशन में पुसौर पुलिस ने उड़ीसा से छत्तीसगढ़ लाए जा रहे अवैध धान को जब्त कर बड़ी कार्रवाई की है। लगातार पेट्रोलिंग, नाकेबंदी और मुखबिर तंत्र को सक्रिय करने के क्रम में सीमा क्षेत्र में अवैध धान की आवक को रोकने और छत्तीसगढ़ की कृषि उपज मंडियों में संभावित बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। 20 नवंबर 2025 को पुसौर पुलिस ने उड़ीसा बॉर्डर के ग्राम त्रिभौना में चेकिंग के दौरान एक पिकअप वाहन क्रमांक CG 10 C 6890 को रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान वाहन में 60 कट्टा अवैध धान पाया गया। वाहन चालक आनंद सा, पिता ईश्वर सा, उम्र 56 वर्ष, निवासी सेमरलिया, थाना कोडकेला, जिला झारसुगुड़ा (उड़ीसा) से पूछताछ की गई। पूछताछ में वह धान को छत्तीसगढ़ की किसी उपज मंडी या संग्रहण केंद्र में बिक्री के उद्देश्य से लाने की बात स्वीकार कर चुका, लेकिन इसके संबंध में कोई वैध दस्तावेज या उत्तर प्रस्तुत नहीं कर सका।

मामले में पुसौर पुलिस ने इस्तगासा क्रमांक 13/2025 धारा 106 बीएनएसएस के तहत कार्रवाई करते हुए पिकअप वाहन को थाने लाया और संबंधित मंडी निरीक्षक को सूचना दी। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी पुसौर निरीक्षक रामकिंकर यादव, उप निरीक्षक कुंदन लाल गौर और हमराह स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस प्रकार की कार्रवाई से अवैध धान व्यापार पर नकेल कसने में मदद मिलती है और स्थानीय किसानों के हित की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार पेट्रोलिंग और
चेकिंग जारी
रहेगी ताकि अवैध धान की आवक और बिक्री को रोका जा सके। इस सफलता से यह स्पष्ट हुआ कि पुसौर पुलिस और जिला प्रशासन कृषि सुरक्षा, कानून का पालन और अवैध व्यापार रोकने के लिए सतत प्रयास कर रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में ऐसे मामलों पर भी समान सतर्कता और त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस की सतर्कता और मुखबिर तंत्र की सक्रिय भूमिका ने अवैध धान की बड़ी खेप को पकड़ा और संभावित आर्थिक एवं सामाजिक नुकसान से बचाया। इससे क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने और अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने में मदद मिली है। इस कार्रवाई को किसानों और आम जनता के हित में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे छत्तीसगढ़ की कृषि उपज मंडियों में धान का अवैध कारोबार रोकने में सफलता मिली है।
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