Bijapur. बीजापुर। महापर्व विजयादशमी के पावन अवसर पर बीजापुर जिले में 103 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि सत्य, सन्मार्ग, संस्कार, सदाचार और सत्य की विजय का प्रतीक यही पर्व है। उन्होंने कहा, “लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्। कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥” – यह श्लोक आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को शांति और नई दिशा की ओर प्रेरित करता है। आत्मसमर्पण करने वाले 103 नक्सलियों पर कुल ₹1 करोड़ 6 लाख 30 हजार तक के इनाम घोषित थे। यह नक्सली पिछले कई वर्षों से लाल आतंक के रास्ते पर भटक रहे थे और सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने हुए थे।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार द्वारा लागू की गई "आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025" और "नियद नेल्ला नार योजना" ने न केवल इन नक्सलियों को विश्वास दिलाया, बल्कि उन्हें समाज में पुनः सकारात्मक भूमिका निभाने का अवसर भी प्रदान किया। अधिकारियों ने बताया कि इन नक्सलियों के आत्मसमर्पण से इलाके में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी और स्थानीय लोगों का जीवन सामान्य हो सकेगा। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह आत्मसमर्पण केवल कानून और प्रशासन की सफलता नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक संदेश है कि हिंसा और आतंक का मार्ग कभी स्थायी समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने सभी आत्मसमर्पण करने वालों को आश्वासन दिया कि उन्हें पूरी सुरक्षा और पुनर्वास की सुविधा प्रदान की जाएगी।

इस अवसर पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने भी आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को संभाला और उनके पुनर्वास के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली अब शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक योगदान देंगे। इस तरह के बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण से न केवल बीजापुर जिले में बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में नक्सलवाद पर काबू पाने में मदद मिलेगी। यह कदम प्रशासन की नीति और स्थानीय समुदाय की सुरक्षा के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या और घोषित इनाम राशि ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की नीतियाँ और समाज में विश्वास जगाने वाले कदम प्रभावी साबित हो रहे हैं। इस मौके पर प्रशासन ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि लाल आतंक और हिंसा से प्रभावित क्षेत्र धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
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