वैशाली। बिहार के वैशाली जिले में गुरुवार को निर्माणाधीन पुल का बड़ा हिस्सा अचानक धराशायी होने से हड़कंप मच गया। हादसा लालगंज प्रखंड के जलालपुर गांव में हुआ, जहां फोरलेन सड़क निर्माण के तहत पुल का निर्माण कार्य चल रहा था। निर्माणाधीन ढांचा अचानक गिरने से मौके पर काम कर रहे कई श्रमिक इसकी चपेट में आ गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में करीब पांच से सात मजदूर घायल हुए हैं। सभी घायलों को तत्काल इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। निर्माणाधीन पुल का लोहे का भारी ढांचा गिरने से कई मजदूर उसके नीचे दब गए। राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया, लेकिन एक मजदूर अब भी मलबे में दबा बताया जा रहा है। उसकी स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। भारी लोहे के ढांचे के नीचे फंसे श्रमिक को बाहर निकालने के लिए बचाव दल प्रयास कर रहे हैं।

निर्माण के दौरान अचानक गिरा पुल का ढांचा

बताया गया कि जलालपुर गांव में फोरलेन परियोजना के तहत पुल का निर्माण कराया जा रहा था। गुरुवार को भी अन्य दिनों की तरह मजदूर निर्माण कार्य में जुटे हुए थे। इसी दौरान निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और कई श्रमिक मलबे की चपेट में आ गए।

पुल का ढांचा गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने में मदद की। इसके बाद प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को हादसे की सूचना दी गई।

मलबे में दबे मजदूर को निकालने की कोशिश

हादसे में घायल श्रमिकों को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। बताया जा रहा है कि कुछ मजदूरों को चोटें आई हैं, जबकि एक मजदूर लोहे के बड़े ढांचे के नीचे दबा हुआ है। उसकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है।

मलबा भारी होने के कारण राहत एवं बचाव दल के सामने श्रमिक को सुरक्षित बाहर निकालने की चुनौती बनी हुई है। बचाव कार्य में सावधानी बरती जा रही है ताकि मलबा हटाने के दौरान दबे हुए मजदूर को और नुकसान न पहुंचे।

घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। प्रशासन की ओर से घटनास्थल की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए निर्माण कार्य से जुड़े पहलुओं की भी जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

तेजस्वी यादव ने सरकार पर साधा निशाना

पुल हादसे को लेकर बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर घटना पर सवाल उठाए। तेजस्वी यादव ने लिखा कि बिहार में फिर एक पुल गिरा है। उन्होंने वैशाली जिले में निर्माणाधीन पुल के गिरने की घटना को भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा।

तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में कहा कि वैशाली जिले में भ्रष्टाचार के बोझ से एक और निर्माणाधीन पुल गिर गया। उन्होंने दावा किया कि हादसे में करीब आधा दर्जन मजदूरों के दबने और घायल होने की खबर है तथा कई मजदूरों की हालत गंभीर है।

तेजस्वी यादव के इस बयान के बाद पुल निर्माण की गुणवत्ता और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है और इसके लिए आधिकारिक जांच का इंतजार है।

निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

निर्माणाधीन पुल के अचानक गिरने की घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फोरलेन जैसी बड़ी परियोजनाओं में निर्माण के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाने की आवश्यकता होती है। ऐसे में काम के दौरान पुल का ढांचा गिरना गंभीर मामला माना जा रहा है।

हादसे की तकनीकी वजह क्या थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। यह भी देखा जाना जरूरी होगा कि निर्माण के दौरान इस्तेमाल किए गए लोहे के ढांचे और अन्य सामग्री की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं। इसके अलावा निर्माण स्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं, इसकी भी जांच की जरूरत है।

हादसे ने बढ़ाई चिंता

वैशाली के जलालपुर में हुआ यह हादसा निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाता है। रोजाना बड़ी संख्या में मजदूर जोखिम वाले निर्माण कार्यों में जुटे रहते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी होने पर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

फिलहाल प्राथमिकता मलबे में दबे मजदूर को सुरक्षित बाहर निकालने और घायल श्रमिकों का बेहतर इलाज कराने की है। प्रशासन और बचाव दल मौके पर स्थिति को संभालने में जुटे हैं। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए आगे जांच की जाएगी।

निर्माणाधीन पुल के गिरने की इस घटना ने एक ओर जहां कई मजदूरों की जान को खतरे में डाल दिया, वहीं दूसरी ओर बिहार में निर्माणाधीन पुलों की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर राजनीतिक सवाल भी खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में हादसे की वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदारी तय होने के बाद संबंधित एजेंसी या अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है

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