पटना। बिहार में महत्वपूर्ण सड़क परियोजना राम जानकी पथ के शेष हिस्से के निर्माण की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। परियोजना के तीसरे और चौथे पैकेज के तहत बनने वाली सड़क की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार कर ली गई है। अब इस डीपीआर को जल्द ही केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजा जाएगा। मंत्रालय से स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य के लिए निविदा जारी की जाएगी। परियोजना के शेष हिस्से के निर्माण पर करीब 8200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
राम जानकी पथ को उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल सीमा के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने वाली अहम परियोजना के तौर पर देखा जा रहा है। इसके निर्माण से धार्मिक स्थलों के साथ-साथ कई शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। परियोजना पूरी होने के बाद उत्तर प्रदेश के मेहरौना घाट से बिहार-नेपाल सीमा के भिट्टा मोड़ तक करीब 240 किलोमीटर लंबा सड़क मार्ग विकसित होगा।
तीन और चार पैकेज में पूरा होगा शेष काम
राम जानकी पथ को अलग-अलग पैकेज में बांटकर निर्माण की योजना तैयार की गई है। इसके तीसरे और चौथे पैकेज में आने वाले हिस्से की डीपीआर अब तैयार हो चुकी है। डीपीआर में सड़क के निर्माण से संबंधित तकनीकी जरूरतों, संरचनाओं और अन्य जरूरी कार्यों का विस्तृत आकलन किया गया है।
अब अगला कदम डीपीआर को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के पास भेजना है। मंत्रालय स्तर पर प्रस्ताव की तकनीकी और वित्तीय समीक्षा के बाद स्वीकृति दी जाएगी। स्वीकृति मिलते ही सड़क निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
सरकारी स्तर पर उम्मीद की जा रही है कि डीपीआर की मंजूरी और निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इससे परियोजना के शेष हिस्से को जमीन पर उतारने का रास्ता साफ होगा।
8200 करोड़ रुपये का होगा निवेश
राम जानकी पथ के तीसरे और चौथे पैकेज के निर्माण पर करीब 8200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इतनी बड़ी लागत वाली सड़क परियोजना से परिवहन सुविधाओं के साथ-साथ संबंधित क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सड़क का निर्माण बेहतर मानकों के अनुरूप किए जाने की योजना है। मार्ग में जरूरत के अनुसार पुल-पुलिया, जल निकासी व्यवस्था, जंक्शन और अन्य यातायात सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इससे स्थानीय आबादी के साथ लंबी दूरी के यात्रियों को भी बेहतर सड़क सुविधा मिलने की संभावना है।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई दिशा
राम जानकी पथ का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका धार्मिक महत्व है। भगवान राम और माता सीता से जुड़ी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं वाले क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने की योजना है। सड़क के विकसित होने के बाद इन क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं। नेपाल सीमा तक मार्ग के विस्तार से भारत और नेपाल के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को भी फायदा मिल सकता है। सड़क संपर्क बेहतर होने से श्रद्धालुओं के लिए यात्रा का समय और परेशानी कम हो सकती है।
भारत-नेपाल सीमा तक आसान होगा आवागमन
मेहरौना घाट से भिट्टा मोड़ तक सड़क बनने से सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। बिहार-नेपाल सीमा के आसपास रहने वाले लोगों के लिए आवागमन के बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क मजबूत होने से स्थानीय बाजारों को बड़े शहरों से जोड़ने में मदद मिल सकती है। कृषि उत्पादों और स्थानीय कारोबार से जुड़े सामान को दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाना आसान हो सकता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
रोजगार और स्थानीय कारोबार को मिलेगा फायदा
बड़ी सड़क परियोजना के निर्माण के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। निर्माण गतिविधियों से जुड़े श्रमिकों के अलावा परिवहन, सामग्री आपूर्ति, खानपान और अन्य सेवाओं में भी स्थानीय लोगों को काम मिल सकता है।
सड़क निर्माण पूरा होने के बाद मार्ग के आसपास पर्यटन आधारित गतिविधियों में भी विस्तार की संभावना है। होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन और छोटे व्यवसायों को इसका फायदा मिल सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी होगी बेहतर
राम जानकी पथ केवल प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली सड़क नहीं होगी, बल्कि इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों को भी बेहतर संपर्क उपलब्ध कराने में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। सड़क बनने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय और बड़े बाजारों तक पहुंच आसान हो सकती है।
स्वास्थ्य और शिक्षा के लिहाज से भी बेहतर सड़क संपर्क महत्वपूर्ण माना जाता है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों तक आने-जाने और लोगों को रोजगार के लिए दूसरे क्षेत्रों में जाने में सुविधा मिल सकती है।
डीपीआर के बाद मंत्रालय की मंजूरी अहम
फिलहाल परियोजना के तीसरे और चौथे पैकेज की डीपीआर तैयार हो चुकी है। अब इसे केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजा जाना है। मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद ही निर्माण के लिए टेंडर जारी किया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया में तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति महत्वपूर्ण होगी। स्वीकृति के बाद निविदा आमंत्रित की जाएगी और चयनित निर्माण एजेंसी को काम सौंपा जाएगा। इसके बाद परियोजना के शेष हिस्से के निर्माण की वास्तविक प्रक्रिया शुरू होगी।
राम जानकी पथ के शेष हिस्से के लिए डीपीआर तैयार होना परियोजना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। करीब 8200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले तीसरे और चौथे पैकेज के जरिए मेहरौना घाट से भिट्टा मोड़ तक लगभग 240 किलोमीटर सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। यह मार्ग उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल सीमा के बीच संपर्क को मजबूत करने के साथ धार्मिक पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अब परियोजना की अगली कड़ी केंद्रीय मंत्रालय की स्वीकृति और उसके बाद शुरू होने वाली निविदा प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।