भागलपुर: जिले में गंगा के बढ़ते जलस्तर से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले करीब 76 घंटे से लगातार बढ़ रही गंगा के जलस्तर में अब कुछ स्थानों पर कमी दर्ज होने लगी है। हालांकि बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। कई निचले इलाकों में पानी भरा हुआ है और तटबंधों पर दबाव बना हुआ है। पीरपैंती क्षेत्र में बाढ़ के पानी के कारण आवागमन प्रभावित है, जबकि इस्माईलपुर-बिंदटोली तटबंध की लगातार निगरानी की जा रही है।
भागलपुर में खतरे के निशान से ऊपर गंगा
बुधवार को भागलपुर में गंगा का जलस्तर करीब 34.60 मीटर दर्ज किया गया था। यहां खतरे का निशान 33.68 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से करीब 92 सेंटीमीटर ऊपर थी। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक जलस्तर में बढ़ोतरी रुकने के बाद राहत के संकेत मिलने शुरू हुए हैं। सुल्तानगंज में पांच सेंटीमीटर और कहलगांव में करीब एक सेंटीमीटर पानी कम होने की सूचना है। जलस्तर में कमी के बावजूद प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। निचले इलाकों में पानी जमा होने और तेज बहाव के कारण कई सड़कों पर आवागमन अब भी जोखिम भरा बना हुआ है।
पीरपैंती में हालात गंभीर
पीरपैंती और कहलगांव क्षेत्र बाढ़ से ज्यादा प्रभावित हैं। पीरपैंती की 15 से अधिक पंचायतों में पानी घुस चुका है। कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है। बुधवार की रिपोर्ट के मुताबिक कहलगांव और पीरपैंती में कुल 31 विद्यालय बंद किए गए, जबकि प्रभावित लोगों के लिए 22 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। पीरपैंती में सिंघिया पुल से आवागमन बंद होने से स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ी है। बाढ़ के दौरान पुलों और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर पानी का दबाव बढ़ने के कारण प्रशासन संवेदनशील स्थानों पर आवाजाही रोक रहा है।
इस्माईलपुर-बिंदटोली तटबंध पर निगरानी
नवगछिया अनुमंडल के इस्माईलपुर-बिंदटोली तटबंध को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है। पिछले दिनों यहां गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था और स्परों पर दबाव बढ़ गया था। 5 सितंबर की रिपोर्ट में स्पर संख्या नौ के पास नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 110 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया था। गोपालपुर, इस्माईलपुर और रंगरा प्रखंड में बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीमें तटबंधों और स्परों की निगरानी कर रही हैं। प्रशासन की चिंता यह है कि जलस्तर घटने के दौरान भी तेज धारा से कटाव का खतरा बना रह सकता है।
राहत के संकेत लेकिन खतरा अभी बरकरार
गंगा के जलस्तर में गिरावट शुरू होना बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत का संकेत है, लेकिन स्थिति सामान्य होने में समय लग सकता है। गांवों, खेतों और संपर्क मार्गों पर जमा पानी उतरने के बाद ही वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा सकेगा। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान संवेदनशील तटबंधों की निगरानी, प्रभावित लोगों तक भोजन और जरूरी सामग्री पहुंचाने तथा सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने पर है। आने वाले दिनों में गंगा का जलस्तर लगातार कम होता है तो भागलपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
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