सोनपुर मंडल ने एक दिन में चलाईं 23 क्रैक मालगाड़ियां, बिना क्रू बदले पूरा किया सफर
सोनपुर। व्यस्त रेलखंडों पर मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने और उपलब्ध परिचालन संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने की दिशा में सोनपुर रेल मंडल ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मंडल ने एक ही दिन में 23 क्रैक मालगाड़ियों का संचालन बिना किसी एन-रूट क्रू परिवर्तन के किया। इस व्यवस्था के कारण मालगाड़ियों को रास्ते में चालक दल बदलने के लिए अतिरिक्त समय तक रोकने की जरूरत नहीं पड़ी और परिचालन में होने वाले अनावश्यक ठहराव को कम किया जा सका।
रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस परिचालन व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य मालगाड़ियों की औसत गति में सुधार करना और व्यस्त रेल नेटवर्क पर उपलब्ध क्षमता का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करना था। सामान्य तौर पर लंबी दूरी की मालगाड़ियों में निर्धारित स्थानों पर क्रू परिवर्तन के कारण ट्रेन को कुछ समय के लिए रोकना पड़ सकता है। इस प्रयोग में एन-रूट क्रू परिवर्तन से बचते हुए मालगाड़ियों को आगे बढ़ाया गया।
समस्तीपुर यार्ड में नहीं बदलना पड़ा क्रू
इस परिचालन की खास बात यह रही कि मालगाड़ियों को समस्तीपुर यार्ड में क्रू परिवर्तन के लिए रोकने की आवश्यकता नहीं पड़ी। इससे ट्रेन के रास्ते में लगने वाला अतिरिक्त समय बचाया जा सका।
व्यस्त रेलखंडों पर मालगाड़ी के रुकने का असर केवल उसी ट्रेन तक सीमित नहीं रहता। कई बार एक ट्रेन के अतिरिक्त ठहराव से पीछे चल रही दूसरी मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन पर भी प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में क्रू परिवर्तन के कारण होने वाले ठहराव को कम करना पूरे रेलखंड की परिचालन क्षमता बेहतर करने में सहायक हो सकता है।
रेलवे के अनुसार, बेहतर योजना और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय से एक दिन में 23 क्रैक मालगाड़ियों का संचालन संभव हुआ।
कटिहार-छपरा रेलखंड पर नौ क्रैक ट्रेनें
रिकॉर्ड परिचालन में कटिहार-छपरा (KIR-CPR) रेलखंड का प्रदर्शन प्रमुख रहा। इस मार्ग पर कुल नौ क्रैक मालगाड़ियों का संचालन किया गया। इन ट्रेनों ने कुल 326 किलोमीटर की दूरी तय की।
रेलवे की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इन ट्रेनों ने यह दूरी करीब 9 घंटे 12 मिनट में पूरी की। इस आधार पर मालगाड़ियों की औसत गति करीब 36 किलोमीटर प्रति घंटा रही।
मालगाड़ियों के संचालन में औसत गति महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि माल ढुलाई की समयबद्धता सीधे रेलवे की लॉजिस्टिक क्षमता से जुड़ी होती है। मालगाड़ी जितने कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंचती है, उतनी जल्दी उसी रेक और अन्य संसाधनों को अगली सेवा में लगाया जा सकता है।
क्या होती है क्रैक मालगाड़ी?
रेलवे परिचालन में ‘क्रैक’ मालगाड़ी ऐसी व्यवस्था को कहा जाता है जिसमें मालगाड़ी को लंबी दूरी तक अधिक निर्बाध तरीके से चलाने की योजना बनाई जाती है। इसमें चालक दल की ड्यूटी, मार्ग और परिचालन व्यवस्था का ऐसा समन्वय किया जाता है जिससे बीच रास्ते में होने वाले अनावश्यक ठहराव को कम किया जा सके।
इसका उद्देश्य मालगाड़ियों की ट्रांजिट अवधि कम करना और उनकी औसत गति बढ़ाना होता है। हालांकि चालक दल की ड्यूटी और विश्राम से जुड़े रेलवे के निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करना आवश्यक रहता है।
सोनपुर मंडल की ओर से किए गए इस परिचालन में 23 मालगाड़ियों को एन-रूट क्रू परिवर्तन के बिना चलाया गया। इससे समस्तीपुर यार्ड जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर ट्रेनों को चालक दल बदलने के लिए रोकने की जरूरत नहीं पड़ी।
नेटवर्क क्षमता का बेहतर इस्तेमाल
रेलवे नेटवर्क पर यात्री और मालगाड़ियां दोनों संचालित होती हैं। व्यस्त रेलखंडों पर उपलब्ध ट्रैक क्षमता का बेहतर उपयोग परिचालन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होता है। किसी ट्रेन के लंबे समय तक खड़े रहने से दूसरे ट्रेनों के लिए रास्ता उपलब्ध कराने में भी दिक्कत हो सकती है।
ऐसे में मालगाड़ियों के अनावश्यक ठहराव को कम करने से रेलवे को उपलब्ध लाइन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है। क्रैक मालगाड़ियों की व्यवस्था इसी उद्देश्य से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सोनपुर मंडल के इस परिचालन में ट्रेनों की योजना इस तरह बनाई गई कि बीच रास्ते में क्रू परिवर्तन के लिए लगने वाले समय को बचाया जा सके।
माल ढुलाई को मिल सकती है रफ्तार
मालगाड़ियों की औसत गति बढ़ने का फायदा माल ढुलाई व्यवस्था को भी मिलता है। रेलवे के जरिए कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, उर्वरक, पेट्रोलियम उत्पाद और अन्य वस्तुओं का बड़े पैमाने पर परिवहन किया जाता है।
यदि मालगाड़ियां कम समय में गंतव्य तक पहुंचती हैं तो रेक का टर्नअराउंड समय भी बेहतर हो सकता है। इससे सीमित संसाधनों के साथ अधिक माल ढुलाई करने की क्षमता विकसित होती है।
रेलवे लगातार मालगाड़ियों की गति और समयबद्धता बढ़ाने के लिए परिचालन स्तर पर अलग-अलग व्यवस्थाओं पर काम करता रहा है। इनमें मार्ग की बेहतर योजना, यार्ड में ठहराव कम करना और क्रू प्रबंधन जैसे उपाय शामिल हैं।
विभागों के बीच समन्वय रहा अहम
एक ही दिन में बड़ी संख्या में क्रैक मालगाड़ियों को चलाने के लिए परिचालन, लोको, क्रू प्रबंधन और कंट्रोल से जुड़े कर्मचारियों के बीच तालमेल महत्वपूर्ण होता है। ट्रेन को बिना अनावश्यक ठहराव के आगे बढ़ाने के लिए पहले से परिचालन योजना तैयार करनी पड़ती है।
इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होता है कि ट्रेन को निर्धारित रेलखंड पर आगे बढ़ने के लिए समय पर रास्ता मिले और चालक दल से संबंधित सभी निर्धारित नियमों का पालन हो।
सोनपुर मंडल में 23 क्रैक मालगाड़ियों के संचालन को इसी समन्वित परिचालन व्यवस्था का परिणाम बताया गया है।
आगे भी बेहतर परिचालन पर जोर
सोनपुर मंडल की इस उपलब्धि से मालगाड़ियों के परिचालन समय में कमी और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की संभावनाएं सामने आई हैं। विशेष रूप से कटिहार-छपरा रेलखंड पर नौ ट्रेनों द्वारा 326 किलोमीटर की दूरी 9 घंटे 12 मिनट में तय करना परिचालन के लिहाज से उल्लेखनीय आंकड़ा बताया गया है।
मंडल का जोर आगे भी मालगाड़ियों के अनावश्यक ठहराव को कम करने, औसत गति में सुधार और रेल नेटवर्क की उपलब्ध क्षमता का अधिक प्रभावी उपयोग करने पर रहेगा।
एक दिन में 23 क्रैक मालगाड़ियों का बिना एन-रूट क्रू परिवर्तन के संचालन यह दिखाता है कि बेहतर योजना और क्रू प्रबंधन के जरिए माल ढुलाई परिचालन में लगने वाले समय को कम किया जा सकता है। इससे मालगाड़ियों की आवाजाही के साथ पूरे रेल नेटवर्क पर ट्रेनों के संचालन को अधिक सुव्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।