गया। बिहार के गया जिले के मायापुर स्थित बिहार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मिलेट्स वैल्यू चेन में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे किसानों को मोटे अनाज की खेती और उससे जुड़ी तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। 16 से 18 सितंबर तक महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों से 233 किसान और 17 अधिकारी केंद्र पहुंचे। तीन दिनों के दौरान किसानों को मिलेट्स की खेती से लेकर बीज उत्पादन और प्रसंस्करण तक की पूरी प्रक्रिया के बारे में प्रशिक्षण दिया गया।

केंद्र में आयोजित प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को मोटे अनाज की खेती की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें उत्पादन के साथ-साथ वैल्यू चेन से जोड़ना है। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने मिलेट्स की खेती के विभिन्न चरणों को करीब से देखा और विशेषज्ञों से इससे संबंधित जानकारी हासिल की।

उत्पादन से प्रसंस्करण तक प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को केवल मिलेट्स की बुआई और खेती तक सीमित जानकारी नहीं दी गई, बल्कि उत्पादन के बाद की पूरी प्रक्रिया को भी समझाया गया। इसमें बीज तैयार करने, फसल उत्पादन, कटाई और प्रसंस्करण से जुड़े पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया।

किसानों को बताया गया कि अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का चयन और उनका उचित प्रबंधन मिलेट्स की बेहतर पैदावार के लिए महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही खेती के दौरान अपनाई जाने वाली तकनीक, फसल प्रबंधन और उत्पादन के बाद अनाज को उपयोगी उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई।

मिलेट्स को खेत से बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया में प्रसंस्करण की अहम भूमिका होती है। ऐसे में किसानों को वैल्यू चेन के विभिन्न चरणों की जानकारी देकर उन्हें खेती को केवल कच्चे उत्पाद के स्तर तक सीमित न रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

महाराष्ट्र, यूपी और बिहार से पहुंचे किसान

मायापुर स्थित केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार के अलग-अलग जिलों से किसान पहुंचे। तीन दिनों में 233 किसानों और 17 अधिकारियों की भागीदारी रही। अलग-अलग क्षेत्रों से आए किसानों को एक ही मंच पर मिलेट्स की खेती और उससे संबंधित गतिविधियों की जानकारी मिली।

विभिन्न राज्यों से आए किसानों के लिए यह प्रशिक्षण अपने-अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार मोटे अनाज की खेती को समझने का अवसर भी बना। किसानों ने केंद्र में उपलब्ध तकनीकों और प्रशिक्षण व्यवस्था को देखा तथा खेती से जुड़े सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे।

अधिकारियों की मौजूदगी से प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विभाग और किसानों के बीच तकनीकी जानकारी के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिला। इससे मिलेट्स को लेकर सरकारी स्तर पर चल रही गतिविधियों और किसानों की जरूरतों के बीच बेहतर समन्वय की संभावना बनी।

मोटे अनाज की खेती पर बढ़ रहा जोर

मिलेट्स यानी मोटे अनाज में बाजरा, रागी, ज्वार, कोदो, कुटकी, सांवा और अन्य पारंपरिक अनाज शामिल हैं। इन फसलों को लेकर कृषि क्षेत्र में लगातार जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मोटे अनाज की खेती को किसानों के लिए एक वैकल्पिक कृषि गतिविधि के रूप में भी देखा जाता है।

मिलेट्स से जुड़े प्रशिक्षण में किसानों को फसल की खेती के साथ-साथ बीज उत्पादन और प्रसंस्करण की जानकारी देना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे किसान पूरी वैल्यू चेन को समझ सकते हैं। यदि किसान उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ते हैं तो कृषि उपज के उपयोग के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।

केंद्र में व्यावहारिक जानकारी पर जोर

बिहार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मिलेट्स वैल्यू चेन में किसानों को प्रशिक्षण के दौरान व्यावहारिक जानकारी देने पर जोर दिया जा रहा है। किसानों को विभिन्न तकनीकों को समझाने के साथ खेती और प्रसंस्करण से जुड़े कार्यों की जानकारी दी गई।

किसानों के लिए इस तरह के प्रशिक्षण का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि खेती में केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। बेहतर बीज, वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन, उचित कटाई, भंडारण और प्रसंस्करण जैसे चरण भी कृषि आय और उत्पाद की उपयोगिता को प्रभावित करते हैं।

मिलेट्स की वैल्यू चेन को समझने के दौरान किसानों को यह जानकारी दी गई कि खेत से निकलने के बाद अनाज की गुणवत्ता बनाए रखने और उसे बाजार की जरूरत के मुताबिक तैयार करने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

किसानों के लिए सीखने का अवसर

महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों के लिए यह प्रशिक्षण अपने अनुभव साझा करने का अवसर भी बना। अलग-अलग क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों के बीच मिलेट्स से संबंधित जानकारी और अनुभवों का आदान-प्रदान हुआ।

किसानों ने केंद्र में प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों से सवाल पूछे और मोटे अनाज की खेती के अलग-अलग पहलुओं को समझा। प्रशिक्षण में बीज तैयार करने से लेकर प्रसंस्करण तक जानकारी मिलने से किसानों को मिलेट्स की खेती को व्यापक नजरिए से देखने का अवसर मिला।

खेती से आगे वैल्यू चेन पर फोकस

मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए केवल किसानों को फसल उगाने की तकनीक बताना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ बीज, उत्पादन, प्रसंस्करण, उत्पाद निर्माण और बाजार तक पहुंच की पूरी व्यवस्था को समझना भी जरूरी है। मायापुर स्थित केंद्र में आयोजित प्रशिक्षण इसी व्यापक दृष्टिकोण पर केंद्रित रहा।

16 से 18 सितंबर तक चले इस कार्यक्रम में 233 किसानों और 17 अधिकारियों की भागीदारी इस बात को दर्शाती है कि मोटे अनाज से जुड़ी तकनीकों को लेकर किसानों और कृषि क्षेत्र के अधिकारियों के बीच प्रशिक्षण की जरूरत बनी हुई है।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के बाद किसानों को मिलेट्स की खेती, बीज तैयार करने और प्रसंस्करण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी मिली। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और मोटे अनाज की वैल्यू चेन को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

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