पटना। पुनपुन नदी का जलस्तर बढ़ने का असर पटना-गया रेलखंड पर ट्रेनों के परिचालन पर पड़ा है। नदी पर बने रेलवे पुल संख्या-21 के आसपास पानी बढ़ने के कारण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डाउन लाइन पर रेल परिचालन अगले आदेश तक निलंबित रखा गया है। इंजीनियरिंग विभाग की सलाह के बाद चार सितंबर की रात से यह व्यवस्था लागू है। इसके चलते रेलवे ने सात सितंबर को 10 मेमू ट्रेनों को रद्द कर दिया है, जबकि कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को बदले हुए मार्ग से चलाने की व्यवस्था की गई है।

रेलवे के इस फैसले का सीधा असर पटना-गया रेलखंड पर प्रतिदिन यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ रहा है। खासकर मेमू ट्रेनों पर निर्भर दैनिक यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। रेलवे की ओर से स्थिति सामान्य होने तक यात्रियों को अपनी ट्रेन की स्थिति और मार्ग की जानकारी लेकर यात्रा करने की सलाह दी जा सकती है।

जानकारी के मुताबिक पुनपुन नदी में पानी का स्तर बढ़ने के बाद रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग ने पुल संख्या-21 की स्थिति का आकलन किया। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए डाउन लाइन पर ट्रेनों का संचालन रोकने की सलाह दी गई। इसके बाद चार सितंबर की रात से इस लाइन पर रेल परिचालन निलंबित कर दिया गया।

रेलवे ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध अगले आदेश तक जारी रहेगा। इसका मतलब है कि नदी का जलस्तर कम होने और इंजीनियरिंग विभाग से सुरक्षित परिचालन की अनुमति मिलने के बाद ही डाउन लाइन पर सामान्य रेल सेवा बहाल की जा सकेगी।

रेलवे पुलों पर नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। तेज बहाव और बढ़ा हुआ पानी पुल के आसपास की संरचना तथा रेल पटरियों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण इंजीनियरिंग टीमें ऐसी परिस्थितियों में लगातार निगरानी करती हैं।

पुनपुन नदी में बढ़े पानी को देखते हुए रेलवे किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता। पुल और ट्रैक को सुरक्षित घोषित किए जाने तक परिचालन पर पाबंदी बनाए रखने का फैसला यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया एहतियाती कदम है।

इसका सबसे बड़ा असर सात सितंबर की रेल सेवाओं पर दिखाई दिया। रेलवे ने इस दिन पटना-गया रेलखंड से संबंधित 10 मेमू ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया। मेमू ट्रेनें इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में दैनिक यात्रियों, छात्रों, कर्मचारियों और छोटे कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण परिवहन साधन हैं।

एक साथ 10 मेमू ट्रेनों के रद्द होने से स्टेशनों पर यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ सकती है। सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले लोगों की संख्या बढ़ने की भी संभावना है। विशेष रूप से छोटे स्टेशनों से नियमित रूप से पटना या गया की ओर जाने वाले यात्रियों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है।

लंबी दूरी और अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों को पूरी तरह रद्द करने के बजाय रेलवे ने कई ट्रेनों का मार्ग बदल दिया है। प्रभावित पटना-गया रेलखंड को बाईपास करने के लिए अधिकांश ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से चलाया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार बदले हुए मार्ग वाली अधिकांश ट्रेनों को पटना से फतुहा, दनियावां, हिलसा, इस्लामपुर और नटेसर होकर चलाने की व्यवस्था की गई है। इस वैकल्पिक रूट के जरिए ट्रेनें पटना-गया रेलखंड के प्रभावित हिस्से से गुजरे बिना आगे की यात्रा कर सकेंगी।

रूट डायवर्जन का असर यात्रा के समय पर भी पड़ सकता है। वैकल्पिक मार्ग से चलने के कारण कुछ ट्रेनों को अपने निर्धारित समय से अधिक समय लग सकता है। यात्रियों को संबंधित ट्रेन के संशोधित समय और स्टेशनों की जानकारी पर ध्यान देना जरूरी होगा।

इस बदलाव का एक दूसरा पहलू भी है। हिलसा, दनियावां, इस्लामपुर और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों के लिए बदले हुए मार्ग से गुजरने वाली ट्रेनें महत्वपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि किसी ट्रेन के अतिरिक्त ठहराव या यात्रियों को चढ़ने-उतरने की सुविधा के बारे में रेलवे की आधिकारिक सूचना को ही अंतिम माना जाना चाहिए।

रेलवे के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। पहली चुनौती पुनपुन पुल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और दूसरी यात्रियों के लिए रेल सेवाओं को यथासंभव जारी रखना है। इसी वजह से जहां स्थानीय मेमू ट्रेनों को रद्द किया गया है, वहीं कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से चलाया जा रहा है।

इंजीनियरिंग विभाग की टीमें नदी के जलस्तर और पुल की स्थिति पर लगातार नजर रख सकती हैं। पानी कम होने के बाद भी रेल परिचालन तुरंत शुरू नहीं किया जाता। पहले पुल, रेलवे ट्रैक और आसपास की संरचना की तकनीकी जांच की जाती है।

रेलवे इंजीनियर यह सुनिश्चित करते हैं कि तेज बहाव के कारण पुल की नींव, पटरियों या आसपास की मिट्टी पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है। तकनीकी रूप से सुरक्षित पाए जाने के बाद ही सामान्य परिचालन बहाल करने की अनुमति दी जाती है।

पटना-गया रेलखंड यात्री परिवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मार्ग है। इस लाइन से बड़ी संख्या में स्थानीय और लंबी दूरी की ट्रेनें गुजरती हैं। गया धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से भी महत्वपूर्ण केंद्र है, जबकि पटना राज्य का प्रमुख परिवहन केंद्र है। इसलिए इस रेलखंड पर परिचालन प्रभावित होने का असर बड़ी संख्या में यात्रियों पर पड़ता है।

स्थानीय यात्रियों के लिए मेमू सेवाओं का महत्व और ज्यादा है। इन ट्रेनों के माध्यम से लोग कम दूरी के स्टेशनों के बीच नियमित यात्रा करते हैं। ऐसे में 10 मेमू ट्रेनों का रद्द होना दैनिक यात्रा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

रेलवे ने वैकल्पिक मार्ग तैयार करके महत्वपूर्ण ट्रेनों का संचालन जारी रखने का प्रयास किया है। पटना-फतुहा-दनियावां-हिलसा-इस्लामपुर-नटेसर मार्ग का इस्तेमाल प्रभावित हिस्से को बाईपास करने के लिए किया जा रहा है।

यात्रियों के लिए जरूरी है कि स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त कर लें। रूट डायवर्जन की स्थिति में ट्रेन अपने सामान्य मार्ग के कुछ स्टेशनों से नहीं गुजरेगी। इसलिए बीच के स्टेशनों से यात्रा करने वाले लोगों को विशेष रूप से सावधानी बरतनी होगी।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पुल संख्या-21 की डाउन लाइन पर सामान्य रेल परिचालन कब तक बहाल होगा। यह पूरी तरह पुनपुन नदी के जलस्तर और तकनीकी जांच पर निर्भर करेगा। पानी घटने के बाद इंजीनियरिंग विभाग की अनुमति मिलने पर रेलवे अगला निर्णय लेगा।

रेलवे की प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा है। इसलिए जलस्तर सामान्य होने और पुल को सुरक्षित घोषित किए जाने तक प्रभावित लाइन पर परिचालन शुरू करने में जल्दबाजी नहीं की जाएगी।

सात सितंबर को 10 मेमू ट्रेनों के रद्द होने और कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के मार्ग बदलने से यात्रियों की परेशानी बढ़ी है। अब सभी की नजर पुनपुन नदी के जलस्तर पर है। पानी कम होने और पुल की तकनीकी स्थिति सुरक्षित पाए जाने के बाद ही पटना-गया रेलखंड पर सामान्य परिचालन बहाल होने का रास्ता साफ होगा।

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