समस्तीपुर। फर्स्ट एसी का बंद कूपा, करीब 1100 किलोमीटर का लंबा सफर और अंदर रखी विदेशी शराब की बड़ी खेप। ऊपर से वैध टिकट के बिना यात्रा और जांच के दौरान अंग्रेजी में बातचीत कर कथित तौर पर रौब जमाने की कोशिश। स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस में सामने आए इस मामले ने रेलवे सुरक्षा और शराब तस्करी के तरीकों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रेन के एसी फर्स्ट क्लास कूपे से 75 लीटर विदेशी शराब के साथ पकड़ी गई नेहा कुमारी उर्फ नेहा झा और उसके जीजा ईशान कुमार से पूछताछ में तस्करी के नेटवर्क से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है।
मामला ट्रेन संख्या 12562 स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस का है। नेहा और ईशान एच-वन कोच के कूप संख्या सात में सफर कर रहे थे। अधिकारियों को वाराणसी रेल मंडल की ओर से ट्रेन में शराब की खेप ले जाए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद समस्तीपुर कंट्रोल को अलर्ट किया गया और ट्रेन के पहुंचने पर संबंधित कूपे की जांच की तैयारी की गई।
बताया जा रहा है कि जब टीम जांच के लिए कूप संख्या सात के पास पहुंची तो दरवाजा अंदर से बंद था। दरवाजा खुलवाने के बाद टीम ने अंदर मौजूद यात्रियों और उनके सामान की जांच शुरू की। इसी दौरान कथित तौर पर दोनों की अधिकारियों से बहस भी हुई। जांच आगे बढ़ी तो सामान के भीतर बड़ी मात्रा में विदेशी शराब मिलने से मामला गंभीर हो गया।
बरामद शराब की कुल मात्रा करीब 75 लीटर बताई गई है। इसके बाद नेहा कुमारी उर्फ नेहा झा और ईशान कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि फर्स्ट एसी के कूपे में यात्रा कर रही नेहा के पास कथित तौर पर सफर के लिए वैध टिकट भी नहीं था। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि वह इतने लंबे मार्ग पर फर्स्ट एसी में बिना वैध टिकट के कैसे यात्रा करती रही।
पूछताछ के दौरान दोनों के यात्रा मार्ग, शराब कहां से लाई गई थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था, जैसे सवालों के जवाब तलाशे गए। अधिकारियों की कोशिश यह पता लगाने की भी है कि यह केवल एक बार की तस्करी थी या इसके पीछे नियमित रूप से काम करने वाला कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है। शराब की इतनी बड़ी मात्रा को फर्स्ट एसी कूपे के जरिए ले जाने के तरीके ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दोनों करीब 1100 किलोमीटर की यात्रा कर समस्तीपुर तक पहुंचे थे। लंबी दूरी की इस यात्रा के दौरान शराब की खेप को सामान्य यात्रियों की नजर से बचाने के लिए फर्स्ट एसी कूपे का इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में स्थिति विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
जांच के दौरान नेहा के व्यवहार की भी चर्चा हो रही है। आरोप है कि उसने अधिकारियों के सामने अंग्रेजी में बातचीत कर प्रभाव बनाने की कोशिश की। लेकिन जब यात्रा से संबंधित दस्तावेज और सामान की जांच हुई तो कथित तौर पर वैध टिकट नहीं मिला और शराब की खेप बरामद हो गई।
अब अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल शराब के स्रोत और उसके अंतिम ठिकाने का है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इतनी मात्रा में विदेशी शराब किस व्यक्ति या समूह ने उपलब्ध कराई और इसे किसे सौंपा जाना था। इसके अलावा दोनों के संपर्कों और पूर्व की यात्राओं के बारे में भी जानकारी जुटाई जा सकती है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस तरह शराब की खेप पहले भी पहुंचाई गई थी या नहीं।
रेल मार्ग से शराब की तस्करी के मामलों में तस्कर जांच से बचने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते रहे हैं। इस मामले में फर्स्ट एसी के अपेक्षाकृत निजी कूपे का इस्तेमाल जांच का महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। कूपे में सीमित यात्रियों की मौजूदगी और निजता के कारण सामान पर सामान्य तौर पर कम संदेह होने की संभावना रहती है।
फिलहाल 75 लीटर विदेशी शराब की बरामदगी के बाद दोनों से मिली जानकारियों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि इस खेप के पीछे कितने लोग सक्रिय थे और इसका नेटवर्क कहां-कहां तक फैला हुआ था।