बिहार-झारखंड बॉर्डर पर अवैध कोयला कारोबार का खुलासा, पांच हाइवा पकड़े गए
औरंगाबाद। बिहार-झारखंड सीमा से सटे अंबा और कुटुंबा थाना क्षेत्रों में कथित अवैध कोयला कारोबार का मामला सामने आया है। सीमा क्षेत्र में अवैध तरीके से कोयले का भंडारण और परिवहन किए जाने की सूचना मिलने के बाद खनन विभाग की टीम ने कार्रवाई शुरू की। रविवार देर रात अंबा थाना क्षेत्र में चलाए गए वाहन जांच अभियान के दौरान कोयला लदे पांच हाइवा पकड़े गए। जांच के दौरान इन वाहनों में लदे कोयले से संबंधित आवश्यक वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
पांचों वाहनों को रोकने के बाद खनन विभाग की टीम ने कोयले की मात्रा, उसके स्रोत और गंतव्य से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वाहन चालकों से कोयले के परिवहन से संबंधित जरूरी कागजात मांगे गए, लेकिन वे मौके पर संतोषजनक और वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके। इसके बाद वाहनों को आगे की जांच के लिए रोक लिया गया।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब सीमा क्षेत्र में झारखंड से कोयला लाकर कथित तौर पर अलग-अलग स्थानों पर जमा करने और फिर वहां से उसकी सप्लाई किए जाने की सूचनाएं मिल रही थीं। खनन विभाग अब पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटा है।
झारखंड से कोयला लाकर डिपो में जमा करने की सूचना
बताया जा रहा है कि झारखंड के विभिन्न इलाकों से वाहनों के जरिए कोयला बिहार सीमा तक लाया जाता है। इसके बाद अंबा और कुटुंबा थाना क्षेत्रों के आसपास संचालित कथित डिपो में इसे जमा किए जाने की सूचना है। यहां से आवश्यकता के अनुसार कोयले को दूसरे स्थानों पर भेजे जाने की आशंका जताई जा रही है।
खनन विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि सीमा क्षेत्र में ऐसे कितने स्थान हैं जहां कोयले का भंडारण किया जा रहा है और इनके संचालन के लिए आवश्यक अनुमति ली गई है या नहीं।
सीमा से लगे इलाके होने के कारण यहां एक राज्य से दूसरे राज्य में भारी वाहनों की आवाजाही लगातार होती रहती है। इसी का फायदा उठाकर अवैध कोयला परिवहन किए जाने की आशंका के मद्देनजर वाहनों की जांच बढ़ाई गई है।
देर रात शुरू हुआ वाहन जांच अभियान
रविवार देर रात खनन विभाग की टीम ने अंबा थाना क्षेत्र में विशेष वाहन जांच अभियान चलाया। इस दौरान कोयला लेकर गुजर रहे हाइवा वाहनों को रोककर उनके दस्तावेज जांचे गए। पांच हाइवा ऐसे मिले जिनमें लदे कोयले के संबंध में आवश्यक वैध दस्तावेज पेश नहीं किए जा सके।
अब विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि पांचों वाहनों में कोयला कहां से लोड किया गया था और उसे कहां पहुंचाया जाना था। वाहन मालिकों और कोयले के संभावित खरीदारों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा सकती है।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि वाहनों के पास परिवहन से संबंधित अन्य जरूरी दस्तावेज मौजूद थे या नहीं। यदि कोयले की खरीद और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों में अनियमितता मिलती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
कथित डिपो की भूमिका की भी जांच
मामले में केवल पकड़े गए पांच हाइवा ही जांच के दायरे में नहीं हैं। सीमा क्षेत्र में संचालित बताए जा रहे कथित कोयला डिपो की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि वहां कोयला किस आधार पर जमा किया जाता है और इसके लिए जरूरी अनुमति उपलब्ध है या नहीं।
यदि जांच में अवैध भंडारण की पुष्टि होती है तो डिपो संचालकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही यह जानकारी जुटाना भी महत्वपूर्ण होगा कि यहां से कोयला किन स्थानों और प्रतिष्ठानों तक भेजा जाता था।
कोयले के अवैध कारोबार में आमतौर पर स्रोत से लेकर परिवहन, भंडारण और बिक्री तक कई स्तर जुड़े हो सकते हैं। इसलिए पकड़े गए वाहनों से मिली जानकारी पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
दस्तावेजों से खुलेगा कोयले का असली स्रोत
खनन विभाग के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल कोयले के स्रोत का है। यदि कोयला वैध खदान या अधिकृत विक्रेता से खरीदा गया था तो उसके संबंध में आवश्यक बिल, चालान और परिवहन दस्तावेज उपलब्ध होने चाहिए। दस्तावेजों के अभाव में कोयले के स्रोत और उसके परिवहन की वैधता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच टीम वाहनों के नंबर और उनके मालिकों से जुड़ी जानकारी के आधार पर आगे की पड़ताल कर सकती है। इसके अलावा वाहनों के पिछले आवागमन और संबंधित कारोबारी प्रतिष्ठानों की जानकारी भी जांच के दायरे में आ सकती है।
सीमा क्षेत्र में बढ़ाई जा सकती है निगरानी
पांच हाइवा पकड़े जाने के बाद बिहार-झारखंड सीमा पर कोयला लेकर गुजरने वाले भारी वाहनों की निगरानी और बढ़ाई जा सकती है। विशेष रूप से रात के समय चलने वाले वाहनों और संदिग्ध भंडारण स्थलों पर नजर रखी जा सकती है।
खनन विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य अवैध खनिज परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के साथ सरकारी राजस्व को होने वाले नुकसान को रोकना भी है। बिना आवश्यक अनुमति और दस्तावेज के खनिजों का परिवहन नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
फिलहाल पकड़े गए पांच हाइवा में लदे कोयले के दस्तावेजों और स्रोत की विस्तृत जांच की जा रही है। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि मामला केवल दस्तावेजों की कमी का है या इसके पीछे बड़े स्तर पर अवैध कोयला कारोबार का नेटवर्क सक्रिय है।