पटना। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) यानी एलजेपीआर के प्रदेश प्रवक्ता मनीष सिंह ने अपने राजनीतिक दायित्व से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को पत्र भेजकर प्रदेश प्रवक्ता के पद से मुक्त करने का आग्रह किया है। मनीष सिंह ने अपने इस्तीफे के पीछे राजनीतिक कारणों या किसी तरह के मतभेद का हवाला देने के बजाय विधिक कार्यों में व्यस्तता और समयाभाव को वजह बताया है।

पार्टी नेतृत्व को भेजे पत्र में मनीष सिंह ने कहा है कि वह विधिक कार्यों के साथ पटना उच्च न्यायालय में नियमित प्रैक्टिस करते हैं। पेशेवर जिम्मेदारियों के कारण उनका अधिकांश समय न्यायिक और कानूनी कार्यों में व्यतीत हो रहा है। ऐसे में पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता के रूप में राजनीतिक गतिविधियों के लिए अपेक्षित समय निकालना उनके लिए लगातार कठिन होता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि समय की कमी के चलते वह अपने राजनीतिक दायित्व के साथ पूरी तरह न्याय नहीं कर पा रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने प्रदेश प्रवक्ता के पद से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया है।

पत्र भेजकर पद से मुक्त करने का आग्रह

मनीष सिंह ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को पत्र भेजकर अपने निर्णय की जानकारी दी। पत्र में उन्होंने अपने पेशेवर दायित्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि नियमित रूप से विधिक कार्यों में व्यस्त रहने के कारण पार्टी की जिम्मेदारी के लिए पर्याप्त समय देना संभव नहीं हो पा रहा है।

प्रदेश प्रवक्ता का दायित्व पार्टी की गतिविधियों और नीतियों को जनता तथा मीडिया के सामने रखने से जुड़ा होता है। इसके लिए नियमित राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी, पार्टी के कार्यक्रमों में उपस्थिति और विभिन्न मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखने की आवश्यकता होती है। मनीष सिंह के अनुसार, मौजूदा व्यस्तताओं के बीच वह इन जिम्मेदारियों के लिए अपेक्षित समय नहीं दे पा रहे थे।

समयाभाव को बताया इस्तीफे की वजह

मनीष सिंह ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि उनका इस्तीफा किसी राजनीतिक असहमति या संगठन के भीतर किसी विवाद के कारण नहीं है। उन्होंने इसे पूरी तरह व्यावसायिक व्यस्तताओं और समय की कमी से जुड़ा निर्णय बताया है।

उन्होंने कहा कि वह अपने विधिक कार्यों और पटना उच्च न्यायालय में नियमित प्रैक्टिस को पर्याप्त समय देना चाहते हैं। दूसरी ओर, पार्टी की जिम्मेदारी भी पूरी प्रतिबद्धता और समय की मांग करती है। दोनों दायित्वों को एक साथ निभाने में कठिनाई महसूस होने के बाद उन्होंने राजनीतिक पद से हटने का निर्णय लिया।

दायित्व के साथ न्याय नहीं कर पाने की बात

अपने पत्र में मनीष सिंह ने यह भी स्वीकार किया कि समयाभाव के कारण वह प्रदेश प्रवक्ता के रूप में अपने दायित्व के साथ पूरी तरह न्याय नहीं कर पा रहे हैं। राजनीतिक संगठन में किसी पद पर रहते हुए सक्रिय रूप से जिम्मेदारी निभाना जरूरी होता है।

उनका कहना है कि यदि वह अपेक्षित समय नहीं दे पा रहे हैं तो पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। इसी सोच के साथ उन्होंने पार्टी नेतृत्व से उन्हें प्रदेश प्रवक्ता के पद से मुक्त करने का अनुरोध किया है।

कानूनी पेशे में सक्रिय हैं मनीष सिंह

मनीष सिंह विधिक क्षेत्र से जुड़े हैं और पटना उच्च न्यायालय में नियमित प्रैक्टिस करते हैं। अदालत में पेशेवर व्यस्तताओं के अलावा विधिक मामलों से जुड़े अन्य कार्य भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं। उनका कहना है कि इन जिम्मेदारियों के कारण राजनीतिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय निकालना मुश्किल हो गया है।

राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं को अक्सर पार्टी के कार्यक्रमों, प्रेस वार्ताओं और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर मीडिया के सामने सक्रिय भूमिका निभानी पड़ती है। ऐसे में प्रवक्ता पद की जिम्मेदारी के लिए लगातार उपलब्ध रहना जरूरी होता है। मनीष सिंह के अनुसार, उनकी वर्तमान पेशेवर स्थिति में यह संभव नहीं हो पा रहा था।

पार्टी से जुड़ाव पर नहीं कही कोई बात

इस्तीफे के संबंध में उपलब्ध जानकारी के अनुसार मनीष सिंह ने केवल अपने राजनीतिक दायित्व से हटने की बात कही है। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता या संगठन से अलग होने की घोषणा नहीं की है। उनका निर्णय फिलहाल प्रदेश प्रवक्ता के पद से मुक्त होने तक सीमित बताया गया है।

इससे यह संकेत मिलता है कि उन्होंने पार्टी से राजनीतिक संबंध खत्म करने के बजाय अपनी व्यावसायिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने के लिए संगठनात्मक पद छोड़ने का फैसला किया है।

संगठन में नई जिम्मेदारी पर नजर

मनीष सिंह के इस्तीफे के बाद अब पार्टी को प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी के लिए नए चेहरे पर निर्णय लेना होगा। प्रवक्ता पार्टी की नीतियों और राजनीतिक रुख को सार्वजनिक मंचों पर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में आने वाले समय में पार्टी नेतृत्व किसी अन्य नेता को यह जिम्मेदारी सौंप सकता है।

हालांकि, मनीष सिंह के इस्तीफे के बाद पार्टी की ओर से उनकी जगह नए प्रदेश प्रवक्ता की नियुक्ति को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। इस संबंध में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व की ओर से लिया जाना है।

पेशेवर व्यस्तताओं को प्राथमिकता

मनीष सिंह के इस्तीफे से यह स्पष्ट है कि उन्होंने अपने पेशेवर दायित्वों को देखते हुए राजनीतिक पद छोड़ने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि समयाभाव के कारण वह संगठन को वह समय नहीं दे पा रहे थे, जिसकी प्रदेश प्रवक्ता के पद पर रहते हुए अपेक्षा की जाती है।

राजनीतिक जिम्मेदारी के साथ न्याय नहीं कर पाने की स्थिति में पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा देने का फैसला उन्होंने उचित समझा। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को अपने निर्णय से अवगत कराते हुए पद से मुक्त करने का अनुरोध किया है।

फिलहाल मनीष सिंह का राजनीतिक दायित्व से इस्तीफा पार्टी के भीतर एक संगठनात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने निर्णय को पूरी तरह विधिक पेशे और समय की कमी से जोड़ते हुए स्पष्ट किया है कि यही उनके इस्तीफे की मुख्य वजह है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व प्रदेश प्रवक्ता के पद पर किसे नई जिम्मेदारी देता है।

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