पटना। बिहार में स्टेट हाईवे और बड़े पुलों से गुजरने वाले वाहनों पर टोल टैक्स लगाने की दिशा में सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य के 50 स्टेट हाईवे और राज्य सरकार के अधीन बने 45 बड़े पुलों का सर्वे पूरा कर लिया गया है। सर्वे के आधार पर अब विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उम्मीद है कि संबंधित एजेंसी इसी महीने अपनी रिपोर्ट पथ निर्माण विभाग को सौंप देगी। रिपोर्ट मिलने के बाद टोल टैक्स की संभावनाओं, दरों और व्यवस्था को लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

पथ निर्माण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सर्वे का मुख्य उद्देश्य इन सड़कों और पुलों पर यातायात के वास्तविक दबाव का आकलन करना है। इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर वाहनों की आवाजाही को कैमरों के माध्यम से रिकॉर्ड किया गया। सर्वे के दौरान यह देखा गया कि संबंधित स्टेट हाईवे और पुलों से एक दिन में कितने वाहन गुजरते हैं और उनमें किस तरह के वाहनों की संख्या अधिक है।

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, प्रत्येक चयनित सड़क और पुल पर लगातार सात दिनों तक वाहनों की आवाजाही का रिकॉर्ड जुटाया गया। सात दिनों के आंकड़ों के आधार पर यातायात का औसत निकालने और अलग-अलग दिनों में वाहनों की संख्या में होने वाले बदलाव का आकलन करने की कोशिश की गई है। इससे टोल लगाने की स्थिति में संभावित राजस्व का अनुमान लगाने में भी मदद मिलेगी।

सर्वे में कैमरों का इस्तेमाल किए जाने से वाहनों की आवाजाही का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया है। इससे मैनुअल तरीके से वाहनों की गिनती में होने वाली गलतियों की संभावना कम हुई है। रिकॉर्ड किए गए आंकड़ों के आधार पर वाहनों की श्रेणीवार संख्या और यातायात की स्थिति का विश्लेषण रिपोर्ट में किया जाएगा।

राज्य सरकार लंबे समय से बेहतर सड़क और पुल infrastructure विकसित करने पर जोर दे रही है। स्टेट हाईवे और बड़े पुलों के निर्माण और रखरखाव पर सरकार को लगातार खर्च करना पड़ता है। ऐसे में इन सड़कों और पुलों से गुजरने वाले वाहनों से टोल के माध्यम से राजस्व जुटाने का विकल्प तलाशा जा रहा है। हालांकि, टोल व्यवस्था लागू करने से पहले यातायात और संभावित राजस्व का विस्तृत आकलन जरूरी है।

इसी उद्देश्य से 50 स्टेट हाईवे और 45 पुलों का चयन कर सर्वे कराया गया। माना जा रहा है कि जिन सड़कों और पुलों पर यातायात अधिक है, वहां टोल वसूली से पर्याप्त राजस्व मिलने की संभावना हो सकती है। वहीं, कम यातायात वाले मार्गों पर टोल लगाने का आर्थिक औचित्य भी रिपोर्ट के आधार पर तय किया जा सकता है।

सर्वे के दौरान केवल वाहनों की संख्या ही नहीं, बल्कि उनकी आवाजाही का पैटर्न भी समझने की कोशिश की गई है। सात दिनों के आंकड़े यह बताने में मदद करेंगे कि किसी सड़क या पुल पर यातायात पूरे सप्ताह किस तरह रहता है। कार्यदिवस और छुट्टी के दिनों में वाहनों की संख्या में कितना अंतर रहता है, इसका भी आकलन रिपोर्ट तैयार करते समय किया जा सकता है।

टोल व्यवस्था लागू होने पर वाहन चालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना है। इसलिए सरकार के लिए यह जरूरी होगा कि टोल दरें तय करते समय आम लोगों और व्यावसायिक वाहनों के हितों का भी ध्यान रखा जाए। स्थानीय और नियमित रूप से इन मार्गों का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों के लिए किसी प्रकार की रियायत या पास व्यवस्था का विकल्प भी सामने आ सकता है।

पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, अभी सर्वे के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट में यातायात की स्थिति, वाहनों की संख्या और संबंधित सड़क एवं पुलों की उपयोगिता सहित विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह तय होगा कि किन सड़कों और पुलों पर टोल वसूली की व्यवस्था लागू की जा सकती है।

टोल व्यवस्था के लिए तकनीकी infrastructure भी महत्वपूर्ण होगा। यदि सरकार टोल वसूली का फैसला करती है तो टोल प्लाजा, कैमरा आधारित निगरानी, डिजिटल भुगतान और वाहनों की पहचान जैसी सुविधाएं विकसित करनी होंगी। इससे टोल संग्रह की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाया जा सकता है। सरकार के सामने यह चुनौती भी होगी कि टोल प्लाजा पर जाम की स्थिति पैदा न हो।

बिहार में सड़क संपर्क बढ़ने के साथ स्टेट हाईवे और पुलों पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव काफी अधिक है। ऐसे में टोल के माध्यम से जुटाए गए राजस्व का इस्तेमाल सड़कों और पुलों के रखरखाव तथा नए infrastructure के विकास में किया जा सकता है।

हालांकि, टोल लागू करने से पहले सरकार को जनता की प्रतिक्रिया और आर्थिक प्रभाव का भी आकलन करना होगा। कई यात्रियों और वाहन मालिकों के लिए पहले से मौजूद राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल के अलावा स्टेट हाईवे और पुलों पर अतिरिक्त शुल्क नया आर्थिक भार बन सकता है। इसलिए टोल व्यवस्था की जरूरत और इसके फायदे को लेकर सरकार को स्पष्ट नीति बनानी होगी।

फिलहाल संबंधित एजेंसी सर्वे से मिले आंकड़ों का विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार कर रही है। विभाग को उम्मीद है कि इसी माह रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। इसके बाद पथ निर्माण विभाग के स्तर पर रिपोर्ट का अध्ययन कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

यदि रिपोर्ट में टोल वसूली को व्यवहारिक और आर्थिक रूप से लाभकारी पाया जाता है, तो बिहार के चयनित स्टेट हाईवे और बड़े पुलों पर टोल व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ सकते हैं। फिलहाल सात दिनों के वाहन सर्वे से जुटाए गए आंकड़े इस पूरी योजना का आधार बनने जा रहे हैं। अब सबकी नजर संबंधित एजेंसी की रिपोर्ट और उसके बाद सरकार के फैसले पर टिकी है।

Tags: