अब दाखिल-खारिज के लिए देने होंगे 200 रुपये, गरीबों को मिलेगा जमीन पर्चा
पटना। बिहार विधानसभा की मंगलवार की कार्यवाही में राज्य से जुड़े सात महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। इनमें बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026 और बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026 प्रमुख रहे। विधानसभा में पारित इन विधेयकों के लागू होने के बाद राज्य में जमीन से जुड़े नियमों, ऑनलाइन जुआ और स्वास्थ्य सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिलेगा।
विधानसभा की दूसरी पाली में सातों विधेयकों को मंजूरी दी गई। इनमें बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026, बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026, बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026, बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026, बिहार चिकित्सा (संशोधन) विधेयक, 2026, बिहार नर्सेज पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 और बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं।
इन सभी विधेयकों को अब राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की सहमति मिलने के बाद ये कानून के रूप में प्रभावी हो जाएंगे। सरकार का कहना है कि इन कानूनों के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने, राजस्व बढ़ाने और जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने के बाद अब राज्य में जमीन का दाखिल-खारिज कराने के लिए 200 रुपये शुल्क देना होगा। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने सदन में इस विधेयक को पेश किया। उन्होंने कहा कि राज्य की विकास योजनाओं और प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए राजस्व वृद्धि जरूरी है।
दाखिल-खारिज शुल्क बढ़ाने के विपक्ष के विरोध पर मंत्री ने कहा कि गरीब वर्ग जमीन खरीदने की स्थिति में कम ही होता है। सरकार भूमिहीन परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी राज्य के 30 हजार भूमिहीन लोगों को बासगीत पर्चा वितरित करेंगे।
मंत्री ने कहा कि बिहार एक लोक कल्याणकारी राज्य है और सरकार लगातार विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। इसके लिए राजस्व के नए स्रोतों की आवश्यकता है। सरकार का उद्देश्य व्यवस्था को बेहतर बनाना और जरूरतमंद लोगों को लाभ पहुंचाना है।
वहीं, बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026 को विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने इसे सदन में पेश किया। उन्होंने कहा कि 1867 में लागू पुराने कानून को समाप्त कर नया कानून लाया गया है। नए कानून में ऑफलाइन जुआघर के साथ-साथ ऑनलाइन जुआ और बेटिंग वेबसाइटों पर भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
नए कानून के तहत जुआ खेलने वालों के अलावा जुआघर संचालकों, प्रबंधकों और ऑनलाइन जुआ चलाने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुआ गतिविधियों को बढ़ावा देने वालों और इसमें सहयोग करने वाले संस्थानों पर भी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष की ओर से कानून के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है, लेकिन सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इसका गलत इस्तेमाल न हो। सार्वजनिक स्थानों पर जुआ खेलते पकड़े जाने पर पुलिस को कार्रवाई करने का अधिकार मिलेगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी विधानसभा ने महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी है। बिहार चिकित्सा (संशोधन) विधेयक, 2026 और बिहार नर्सेज पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किए गए। स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने बताया कि नए प्रावधान लागू होने के बाद देश के अन्य राज्यों में पंजीकृत डॉक्टर और नर्स बिहार में स्व-प्रमाणन प्रमाणपत्र के आधार पर प्रैक्टिस कर सकेंगे।
पहले दूसरे राज्यों से आने वाले डॉक्टरों और नर्सों को बिहार में काम करने के लिए अलग से पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। नए कानून से यह प्रक्रिया आसान होगी। साथ ही गलत आचरण या नियमों के उल्लंघन पर पंजीकरण रद्द करने का भी प्रावधान रखा गया है।
इसके अलावा बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी गई। उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इसे जनहित में बताया और कहा कि यह जीएसटी काउंसिल की सिफारिशों के आधार पर लाया गया है।
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया, जिसे भी सदन ने पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि इन सातों कानूनों के लागू होने से प्रशासनिक सुधार, राजस्व वृद्धि और जनहित से जुड़े कार्यों को नई गति मिलेगी।