पटना। पूर्व मध्य रेल (ECR) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में माल ढुलाई के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड कायम किया है। जोन ने इस अवधि में 203.42 मिलियन टन माल लदान कर भारतीय रेल में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। इस उपलब्धि के साथ पूर्व मध्य रेल देश के शीर्ष चार सर्वाधिक माल ढुलाई करने वाले रेलवे जोन में शामिल हो गया है।
पूर्व मध्य रेल के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि लगातार दूसरे वर्ष जोन ने 200 मिलियन टन से अधिक माल लदान का आंकड़ा पार किया है। इससे पहले वित्तीय वर्ष 2024-25 में पूर्व मध्य रेल ने 202.63 मिलियन टन माल का लदान किया था। इस वर्ष इसमें और वृद्धि दर्ज करते हुए जोन ने नया कीर्तिमान बनाया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस उपलब्धि के पीछे बेहतर परिचालन व्यवस्था, मालगाड़ियों के सुचारू संचालन और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की अहम भूमिका रही है। नवागत महाप्रबंधक डिम्पी गर्ग के नेतृत्व में परिचालन व्यवस्था को मजबूत करने और माल परिवहन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयास किए गए।
पूर्व मध्य रेल के प्रदर्शन में दीन दयाल उपाध्याय मंडल (डीडीयू मंडल) का योगदान महत्वपूर्ण रहा। मंडल रेल प्रबंधक उदय सिंह मीना के नेतृत्व में मालगाड़ियों के रखरखाव, परिचालन व्यवस्था, इंटरचेंज और कोयला परिवहन के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया गया।
रेलवे के लिए माल ढुलाई आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न, लौह अयस्क और अन्य औद्योगिक सामग्री के परिवहन में रेलवे की भूमिका अहम होती है। पूर्व मध्य रेल ने इस क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपनी क्षमता को साबित किया है।
अधिकारियों का कहना है कि माल लदान बढ़ाने के लिए समयबद्ध परिचालन, संसाधनों का बेहतर उपयोग और मालगाड़ियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अलावा मालगाड़ियों के आवागमन में होने वाली देरी को कम करने के लिए भी कई स्तरों पर सुधार किए गए।
डीडीयू मंडल देश के प्रमुख माल परिवहन केंद्रों में शामिल है। यहां से बड़ी मात्रा में कोयला और अन्य औद्योगिक सामग्री का परिवहन किया जाता है। मंडल ने मालगाड़ियों के रखरखाव और परिचालन क्षमता में सुधार करते हुए पूर्व मध्य रेल की उपलब्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इंटरचेंज व्यवस्था में सुधार से भी मालगाड़ियों के संचालन को गति मिली। अलग-अलग जोन के बीच बेहतर तालमेल के कारण माल परिवहन अधिक सुचारू हुआ और समय की बचत हुई।
कोयला परिवहन में भी पूर्व मध्य रेल ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। बिजली उत्पादन केंद्रों तक कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने में रेलवे की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। समय पर कोयला पहुंचाने के लिए मालगाड़ियों के संचालन को प्राथमिकता दी गई।
इस उपलब्धि को रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया जा रहा है। परिचालन विभाग, इंजीनियरिंग विभाग, मैकेनिकल विभाग और अन्य शाखाओं के बेहतर समन्वय से यह लक्ष्य हासिल किया गया।
पूर्व मध्य रेल लगातार अपनी माल परिवहन क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। रेलवे का उद्देश्य अधिक से अधिक माल को सड़क परिवहन से रेल परिवहन की ओर लाना है, जिससे लागत कम होने के साथ-साथ पर्यावरण को भी लाभ मिलता है।
रेलवे के अनुसार, माल ढुलाई में वृद्धि से न केवल राजस्व बढ़ता है बल्कि देश के औद्योगिक विकास में भी सहायता मिलती है। बड़े पैमाने पर माल परिवहन के लिए रेलवे एक भरोसेमंद माध्यम है।
पूर्व मध्य रेल की इस उपलब्धि को भारतीय रेल के स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 203.42 मिलियन टन माल लदान का आंकड़ा हासिल करना जोन की परिचालन क्षमता और प्रबंधन दक्षता को दर्शाता है।
महाप्रबंधक डिम्पी गर्ग ने अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि बेहतर योजना, टीमवर्क और समर्पण के कारण यह उपलब्धि हासिल हो सकी है।
आने वाले समय में भी पूर्व मध्य रेल माल ढुलाई के क्षेत्र में नए लक्ष्य तय कर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है। रेलवे की कोशिश है कि ग्राहकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं और माल परिवहन को और अधिक तेज, सुरक्षित और प्रभावी बनाया जाए।
लगातार दो वर्षों तक 200 मिलियन टन से अधिक माल लदान करना पूर्व मध्य रेल के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे जोन की पहचान देश के प्रमुख माल ढुलाई वाले रेलवे जोन के रूप में और मजबूत हुई है।