बिहार में घट रही बेटियों की संख्या मुंगेर में जन्म दर का बड़ा अंतर
गिरावट चार साल में बढ़ी चिंता
मुंगेर: बिहार में लिंगानुपात को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। मुंगेर जिले में पिछले चार वर्षों के दौरान बेटों की तुलना में बेटियों के जन्म में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार यहां बेटियों के जन्म का अनुपात करीब 27 प्रतिशत तक कम हुआ है, जिससे स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संगठनों की चिंता बढ़ गई है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों के बावजूद समाज में बेटियों को लेकर सोच में पूरी तरह बदलाव नहीं आ पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि घटते लिंगानुपात के पीछे कई सामाजिक कारण हो सकते हैं, जिनमें बेटों की चाह, भ्रूण लिंग जांच जैसी अवैध गतिविधियां और जागरूकता की कमी प्रमुख हैं।
मुंगेर में जन्म लेने वाले बच्चों के आंकड़ों में लगातार बदलाव देखा गया है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में बेटियों की संख्या में गिरावट आई है, जबकि बेटों का जन्म अनुपात अधिक रहा है। इससे भविष्य में सामाजिक संतुलन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। जानकारों के मुताबिक किसी भी समाज के संतुलित विकास के लिए लड़के और लड़कियों की संख्या में समानता जरूरी है। अगर बेटियों की संख्या लगातार कम होती रही तो आने वाले समय में विवाह, परिवार व्यवस्था और सामाजिक संरचना पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। सरकार की ओर से कन्या जन्म को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। गर्भ में लिंग जांच रोकने के लिए कानून भी बनाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों पर बेटियों को लेकर पुरानी सोच अब भी चुनौती बनी हुई है।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन अब ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने की तैयारी में है जहां बेटियों के जन्म का अनुपात कम हो रहा है। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाने, गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने और लोगों को बेटियों के महत्व के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है। सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि बेटी को बोझ नहीं बल्कि परिवार और समाज की ताकत मानने वाली सोच विकसित करनी होगी। तभी लिंगानुपात में सुधार लाया जा सकता है और बेटियों को समान अवसर मिल पाएंगे।