गोपालगंज। शिक्षा विभाग ने लापरवाही और अनियमितताओं के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) अमरेंद्र कुमार पांडेय ने अलग-अलग मामलों की जांच के बाद तीन प्रधानाध्यापकों और एक प्रधान शिक्षिका के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है।
विभाग की इस कार्रवाई से शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में अनुशासन, पारदर्शिता और बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, बैकुंठपुर प्रखंड में औचक निरीक्षण के दौरान कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई थीं। जांच के बाद दो प्रधानाध्यापकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
औचक निरीक्षण के दौरान स्कूलों में व्यवस्थाओं, कार्य प्रणाली और विभागीय निर्देशों के पालन से जुड़े मामलों की जांच की गई थी। निरीक्षण में सामने आई कमियों के आधार पर संबंधित प्रधानाध्यापकों से जवाब मांगा गया और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्रवाई की गई।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। ऐसे में यदि कोई शिक्षक या प्रधानाध्यापक अपने दायित्वों में लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा एक अन्य मामले में डीएलएड प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र से जुड़े मामले में एक प्रधान शिक्षिका को निलंबित किया गया है। विभाग ने प्रमाण-पत्र से संबंधित अनियमितता की जांच के बाद यह कदम उठाया।
शिक्षा विभाग ने शिक्षा सेवक (तालीमी मरकज) के चयन में अनियमितता के मामले में भी कार्रवाई की है। इस मामले में एक प्रधानाध्यापक को निलंबित किया गया है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार पांडेय ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। स्कूलों में नियमित निरीक्षण और जांच की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
शिक्षा विभाग का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने और जवाबदेही तय करने पर जोर दिया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि निलंबन की कार्रवाई केवल दंडात्मक कदम नहीं है, बल्कि इससे अन्य कर्मचारियों और शिक्षकों को भी अपने कार्य के प्रति जिम्मेदार रहने का संदेश मिलता है।
शिक्षा विभाग समय-समय पर स्कूलों में उपस्थिति, शैक्षणिक गतिविधियों, योजनाओं के संचालन और प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा करता है। इसी क्रम में मिली शिकायतों और निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाती है।
स्थानीय स्तर पर भी विभाग की इस कार्रवाई को लेकर चर्चा है। लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में व्यवस्था सुधारने के लिए ऐसी सख्ती जरूरी है।
अधिकारियों ने बताया कि आगे भी यदि किसी विद्यालय में अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
विभाग का उद्देश्य स्कूलों में बेहतर माहौल तैयार करना और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिए शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों की जिम्मेदारी तय की जा रही है।
फिलहाल चार शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद विभाग अन्य मामलों की भी समीक्षा कर रहा है। आने वाले दिनों में कुछ और मामलों में कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।