पटना। बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विधान परिषद की चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव होने हैं। चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार का मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प माना जा रहा है क्योंकि प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने भी चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है।

जन सुराज के सूत्रधार और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने रविवार को विधान परिषद चुनाव के लिए पांच सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पार्टी इस चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतर रही है और जल्द ही बाकी सीटों के उम्मीदवारों का ऐलान भी कर दिया जाएगा।

प्रशांत किशोर ने बताया कि तीन अन्य उम्मीदवारों के नामों की घोषणा अगले चार दिनों के भीतर कर दी जाएगी। इससे साफ है कि जन सुराज विधान परिषद की सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।

विधान परिषद चुनाव के लिए घोषित पांच उम्मीदवारों को लेकर जन सुराज ने कहा है कि पार्टी शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में जाएगी। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि उनकी पार्टी पारंपरिक राजनीति से अलग मुद्दों के आधार पर चुनाव लड़ रही है।

उन्होंने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि जिस विधान परिषद क्षेत्र से जन सुराज का उम्मीदवार जीत हासिल करेगा, वहां के 10 हजार पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार देने का काम पार्टी करेगी। प्रशांत किशोर ने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना जन सुराज की प्राथमिकता है।

बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन सीटों का चुनाव आम विधानसभा चुनावों से अलग होता है। इन सीटों पर केवल संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत स्नातक और शिक्षक मतदाता ही मतदान करते हैं। ऐसे में उम्मीदवारों के लिए शिक्षित वर्ग और शिक्षक समुदाय के बीच मजबूत पकड़ बनाना महत्वपूर्ण होता है।

इस चुनाव में सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी दलों के बीच मुकाबला पहले से ही महत्वपूर्ण माना जा रहा था, लेकिन जन सुराज की एंट्री ने राजनीतिक समीकरणों को और रोचक बना दिया है। पार्टी पहली बार विधान परिषद चुनाव में अपनी संगठनात्मक ताकत आजमाने जा रही है।

प्रशांत किशोर लंबे समय से बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं और जन सुराज अभियान के जरिए राज्यभर में जनसंपर्क कर चुके हैं। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पलायन जैसे मुद्दों को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बनाया है।

जन सुराज का दावा है कि वह नए चेहरों और स्थानीय मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में उतरेगी। पार्टी का कहना है कि विधान परिषद जैसे मंच पर शिक्षित वर्ग के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की जरूरत है।

वहीं, दूसरी ओर राज्य के प्रमुख राजनीतिक दल भी अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। भाजपा, जदयू, राजद, कांग्रेस और अन्य दल अपने-अपने उम्मीदवारों के चयन और चुनावी समीकरणों पर काम कर रहे हैं।

विधान परिषद चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक दलों की संगठन क्षमता की भी परीक्षा होगी। क्योंकि इन सीटों पर मतदाताओं की संख्या सीमित होती है, इसलिए उम्मीदवारों का व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय प्रभाव काफी अहम माना जाता है।

प्रशांत किशोर ने उम्मीदवारों की घोषणा के दौरान कहा कि जन सुराज बिहार की राजनीति में बदलाव के उद्देश्य से काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी युवाओं और शिक्षित मतदाताओं की अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर चुनाव लड़ेगी।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी आने वाले समय में संगठन को और मजबूत करेगी। जन सुराज लंबे समय से राज्य के अलग-अलग जिलों में संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रही है और अब चुनावी राजनीति में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

विधान परिषद की आठ सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में कुल राजनीतिक समीकरण कई स्तरों पर प्रभावित हो सकते हैं। जहां पुराने राजनीतिक दल अपने पारंपरिक वोट बैंक के भरोसे मैदान में उतरेंगे, वहीं जन सुराज नए मतदाताओं और बदलाव की राजनीति के मुद्दे के साथ अपनी जगह बनाने की कोशिश करेगी।

शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में अक्सर शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, सरकारी नीतियां और युवाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहते हैं। ऐसे में इस बार चुनाव प्रचार के दौरान इन्हीं विषयों पर राजनीतिक दलों के बीच बहस देखने को मिल सकती है।

जन सुराज की ओर से सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ने के संकेत के बाद मुकाबला बहुकोणीय होने की संभावना बढ़ गई है। अब सभी दल अपने उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।

बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजे न केवल परिषद की सीटों के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे, बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों का भी संकेत दे सकते हैं। जन सुराज के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक मौजूदगी साबित करने का बड़ा अवसर माना जा रहा है।

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