बिहार में पांच साल में 10 हजार उद्योग स्थापित करने का लक्ष्य, CM ने किया बड़ा ऐलान
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए अगले पांच वर्षों में 10 हजार औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में मदद करने का लक्ष्य घोषित किया है। उन्होंने कहा कि बिहार में उद्योग और निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा रहा है और अब तक करीब एक हजार औद्योगिक इकाइयों को जमीन आवंटित की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने शनिवार को पटना के तारामंडल में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज कार्यक्रम में यह बात कही।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘नेशनल इनोवेशन चैलेंज’ पोर्टल का लोकार्पण किया। इसके साथ ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी कार रैली के तहत 25 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में लगाई गई इनोवेशन प्रदर्शनी का भी निरीक्षण किया और युवा उद्यमियों से उनके स्टार्टअप, उत्पाद और नए प्रयोगों के बारे में जानकारी ली।
एक हजार उद्योगों को जमीन देने का दावा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य में औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है। अब तक करीब एक हजार औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन आवंटित की गई है। उन्होंने अगले पांच वर्षों में 10 हजार उद्योगों की स्थापना में मदद करने का लक्ष्य बताया। यह राज्य सरकार द्वारा घोषित लक्ष्य है और इसकी वास्तविक उपलब्धि आने वाले वर्षों में निवेश तथा इकाइयों की स्थापना के आंकड़ों से स्पष्ट होगी।
राज्य का उद्योग विभाग निवेश और औद्योगिक इकाइयों से जुड़ी विभिन्न नीतियों पर काम कर रहा है। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 की वैधता बढ़ाने और प्रस्तावित एमएसएमई नीति 2026 से संबंधित जानकारी भी प्रकाशित की गई है।
रोजगार के लिए पलायन का मुद्दा उठाया
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बिहार से रोजगार और मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में जाने वाले लोगों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि करीब 12 लाख लोग काम के लिए राज्य से बाहर जाते हैं। सरकार का उद्देश्य बिहार में उद्योग और उद्यमिता को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करना है। 12 लाख का यह आंकड़ा मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाने की मजबूरी कम करने के उद्देश्य से उद्योगों और उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने युवा उद्यमियों से नए स्टार्टअप शुरू करने और बिहार में निवेश करने का आह्वान किया।
युवा उद्यमियों को सहयोग का भरोसा
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की युवा आबादी और उसकी तकनीकी क्षमता को विकास की ताकत के रूप में इस्तेमाल करने की जरूरत है। उनके अनुसार नए विचारों और स्टार्टअप के माध्यम से युवा उद्यमी राज्य की आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने ऐसे प्रयासों में राज्य सरकार की ओर से सहयोग देने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने सेवा, नवाचार, तकनीक और उद्यमिता को बिहार की विकास यात्रा के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नए प्रयोगों को बढ़ावा देने के लिए ‘Bihar Tech Portal for Innovation in IT Sector’ का भी उल्लेख किया गया।
नेशनल इनोवेशन चैलेंज पोर्टल लॉन्च
राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने इससे संबंधित पोर्टल लॉन्च किया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं के नए विचारों, तकनीकी प्रयोगों और उद्यमिता को मंच उपलब्ध कराना बताया गया है। प्रदर्शनी में विभिन्न स्टार्टअप और इनोवेशन से जुड़े स्टॉल लगाए गए थे, जिनका मुख्यमंत्री ने निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने युवा उद्यमियों से बातचीत कर उनके उत्पादों और योजनाओं की जानकारी भी ली। कार्यक्रम में उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह समेत राज्य सरकार और संगठन से जुड़े कई पदाधिकारी मौजूद थे।
तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में तकनीक के माध्यम से सरकारी सेवाओं और आम लोगों की सुविधाओं में सुधार की बात भी कही। उन्होंने डिजिटल भुगतान और डीबीटी का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक के जरिए योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बाढ़ प्रभावित नौ लाख परिवारों को डीबीटी के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक सहायता राशि सीधे संबंधित परिवारों के बैंक खातों में भेजी गई।
शिक्षा और कौशल को उद्योग से जोड़ने पर फोकस
कार्यक्रम में शिक्षा और तकनीक से संबंधित सरकारी पहलों का भी जिक्र हुआ। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और डिजिटल मेंटरशिप जैसी सुविधाओं की चर्चा की। उन्होंने कहा कि युवाओं को बेहतर शिक्षा और तकनीकी अवसर उपलब्ध कराने के साथ उन्हें उद्यमिता की ओर भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
औद्योगिक विस्तार के लिए जमीन और निवेश के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होगी। सरकार के घोषित लक्ष्य के मुताबिक आने वाले पांच वर्षों में बड़े पैमाने पर नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में सहायता करने की योजना है।
पांच वर्षों के लक्ष्य पर रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित 10 हजार औद्योगिक इकाइयों के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार निवेश, भूमि आवंटन, आधारभूत ढांचे और उद्यमियों को मिलने वाली सुविधाओं के स्तर पर क्या कदम उठाती है।
फिलहाल सरकार का कहना है कि करीब एक हजार उद्योगों के लिए जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है और अगले पांच वर्षों में इस संख्या को बड़े स्तर पर बढ़ाने का लक्ष्य है। राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज जैसे कार्यक्रमों के जरिए युवाओं और स्टार्टअप को भी इस औद्योगिक अभियान से जोड़ने की तैयारी है।