पटना। बिहार प्रदेश मुखिया महासंघ ने पंचायती राज विभाग से 1830 करोड़ रुपये का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है। शनिवार को पटना में पंचायत प्रतिनिधियों और महासंघ के प्रखंड अध्यक्षों की बैठक में विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठाए गए। महासंघ ने कहा कि पंचायतों से जुड़ी राशि और उसके खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी कि मांगों और पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो राज्य स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

बैठक में महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल को धरातल पर सफल बनाने के लिए पंचायतों और पंचायती राज विभाग के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार के मुख्यमंत्री हैं और उन्होंने अप्रैल 2026 में पदभार संभाला था। महासंघ का कहना है कि पंचायत स्तर पर योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए विभागीय अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलना चाहिए।

1830 करोड़ रुपये को लेकर उठाए सवाल

बैठक का प्रमुख मुद्दा 1830 करोड़ रुपये की राशि रहा। मुखिया महासंघ ने पंचायती राज विभाग से मांग की कि इस राशि से संबंधित पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए। हालांकि उपलब्ध स्वतंत्र आधिकारिक स्रोतों से महासंघ द्वारा बताए गए इस 1830 करोड़ रुपये के आंकड़े की पुष्टि नहीं हो सकी है। बिहार सरकार के वित्तीय खातों से संबंधित आधिकारिक रिपोर्टें प्रधान महालेखाकार की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

महासंघ ने मांग की कि संबंधित राशि कहां और किन मदों में खर्च की गई या आवंटित की गई, इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से पंचायत प्रतिनिधियों और जनता के सामने रखी जाए। संगठन ने पारदर्शिता को पंचायत व्यवस्था के लिए जरूरी बताया।

अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर लगाया आरोप

बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों ने पंचायती राज विभाग के कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। महासंघ का आरोप है कि कुछ अधिकारियों के कामकाज के तरीके के कारण पंचायत स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में परेशानी आ रही है।

महासंघ के अनुसार ग्राम पंचायतें सीधे ग्रामीण आबादी से जुड़ी होती हैं और सड़क, नाली, स्वच्छता, पेयजल तथा अन्य स्थानीय विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में विभागीय स्तर पर प्रक्रिया में देरी होने का असर स्थानीय योजनाओं पर पड़ सकता है।

हालांकि अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर लगाए गए ये आरोप मुखिया महासंघ के हैं। संबंधित विभाग की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर उसका पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।

मुख्यमंत्री की पहल को सफल बनाने की बात

बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल का भी उल्लेख किया। महासंघ के सदस्यों का कहना है कि राज्य सरकार की योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने में पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकताओं को जमीन पर लागू करने के लिए पंचायती राज विभाग और निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के बीच तालमेल जरूरी है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पदभार संभालने के बाद अधिकारियों को नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने और लोगों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर से बचाने के लिए व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए थे।

महासंघ ने इसी संदर्भ में कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं का समाधान भी समय पर होना चाहिए ताकि विकास योजनाओं को लागू करने में प्रशासनिक अड़चनें न आएं।

पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं पर चर्चा

पटना में आयोजित बैठक में अलग-अलग क्षेत्रों से आए पंचायत प्रतिनिधियों और प्रखंड अध्यक्षों ने अपनी समस्याएं रखीं। इनमें योजनाओं के संचालन, विभागीय सहयोग और वित्तीय मामलों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।

प्रतिनिधियों का कहना था कि पंचायतों को विकास कार्यों की जिम्मेदारी तो दी जाती है, लेकिन यदि विभागीय स्तर पर आवश्यक सहयोग समय पर नहीं मिले तो योजनाओं को निर्धारित अवधि में पूरा करना मुश्किल हो जाता है। महासंघ ने इन समस्याओं के समाधान के लिए विभाग से ठोस पहल की मांग की।

हिसाब सार्वजनिक नहीं हुआ तो आंदोलन

मुखिया महासंघ ने बैठक के बाद स्पष्ट किया कि 1830 करोड़ रुपये से संबंधित मांगा गया विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया और पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं पर कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।

महासंघ ने इसके लिए ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ कार्यक्रम आयोजित करने की भी बात कही है। संगठन के मुताबिक इस कार्यक्रम के जरिए पंचायत प्रतिनिधि अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाएंगे। आंदोलन की तारीख और विस्तृत कार्यक्रम के संबंध में आगे फैसला किया जा सकता है।

विभाग के पक्ष का भी इंतजार

महासंघ की ओर से उठाए गए वित्तीय सवाल और अधिकारियों की कार्यप्रणाली संबंधी आरोपों पर पंचायती राज विभाग की विस्तृत प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। खास तौर पर 1830 करोड़ रुपये के आंकड़े और उसके उपयोग से संबंधित सवाल पर आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

बिहार सरकार का वित्त विभाग राज्य के बजट, आवंटन और व्यय से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज प्रकाशित करता है। ऐसे में महासंघ द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब संबंधित विभाग के आधिकारिक वित्तीय विवरण से स्पष्ट हो सकता है।

फिलहाल बिहार प्रदेश मुखिया महासंघ ने अपनी मांगों को लेकर रुख स्पष्ट कर दिया है। संगठन का कहना है कि पंचायतों को विभागीय सहयोग मिलने और वित्तीय मामलों में पारदर्शिता रहने से ही ग्रामीण स्तर की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा। मांगों पर समाधान नहीं निकलने की स्थिति में महासंघ ने राज्य स्तर पर आंदोलन और ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ कार्यक्रम की चेतावनी दी है।

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